***.......सीधी खरी बात.......***

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डॉ आशुतोष शुक्ल


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फिर हिंसक सच्चे सौदे वाले ?

Posted On: 28 Feb, 2010  
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आयकर में राहत…

Posted On: 27 Feb, 2010  
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पाक के साथ समग्र वार्ता कब और क्यों ?

Posted On: 26 Feb, 2010  
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क्रिकेट परीक्षा के समय ही क्यों ?

Posted On: 25 Feb, 2010  
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के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

जय श्री राम जबसे मोदी सरकार आई चर्च ने अस्थिर करने के लिए साजिस शुरू कर दी जिसमे देश का एक बडा मीडिया का भाग कुछ सेकुलर और मुस्लिम वोटो के लालची नेता और मूर्ख और लालची बुद्दिजीवी शामिल हो गए जिनका एक ही मकसद था मोदीजी/बीजेपी और राष्ट्रवादी हिन्दुओ का विरोध देश में बिहार में पाकिस्तानी झानेदे फहरते,देश विरोधी नारे लगते कई प्रदेशो में दलितों पर आत्याचार होते इलाहाबाद के स्क्कूल ने नेशनल एंथम मना कर दिया मीडिया चुप दादरी पर महीनो चिल्लाने वाले जब कर्णाटक केरला या अन्य जगह होंदु मारे जाते तो सांप सूंघ जाता विदेशी दल्तो मुसलमानों को एक साथ ला कर देश में विभाजन करवाना चाहते और देशी लोग भी शामिल हो गए कुछ नेता तो देश को भी कुर्सी के लिए बेच दे जो लोग गो रक्षको का विरोध कर रहे टीक लेकिन जो लोग अवैध तरीके से मार रहे उनपर क्यों चुप्पी य़लगता है देश में मुसलमानों के लिए कोइ कानून नाहे सारा दोष हिन्दुओ का जिनको अपनी आवाज़ उठाने का कोइ अधिकार नहीं क्योंकि बिकाऊ मीडिया उनके खिलाफ है.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

सत्तारूढ़ दल की बिडम्बना यही है कि उसके पल्ले भस्मासुर पड़ जाते हैं - कभी राम जेठमलानी तो कभी सुब्रह्मण्यम स्वामी । ऐसे भस्मासुरों को पहले ही पहचानकर दूर रखा जाना चाहिए । एक बार दल में घुस गए तो उसका भट्ठा बिठाए बग़ैर इन्हें चैन नहीं पड़ने वाला । ऐसे ही लोगों के लिए कहा गया है - हुए तुम दोस्त जिनके, दुश्मन उनका आसमां क्यों हो । सत्तारूढ़ दल को इस प्रश्न का भी उत्तर देना होगा कि ऐसे व्यक्ति को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत क्यों करवाया गया ? मनोनीत सदस्य तो ऐसे अ-राजनीतिक व्यक्ति होते हैं जिन्होंने किसी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की हो, जैसे लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर, आर. के. नारायण, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान आदि । सुब्रह्मण्यम स्वामी को इस श्रेणी में डालने का क्या औचित्य था ? अब वे अपने दल ही नहीं, प्रधानमंत्री और सम्पूर्ण राष्ट्र की किरकिरी करवाने में लगे हुए हैं । आपका लेख एकदम सटीक है आशुतोष जी । साधुवाद ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

कांग्रेस कोइ पार्टी नहीं रह गयी है, बल्कि एक परिवार की राजसात बन कर रह गयी है ! कल तक दिग्विजय सिंह सोनिया जी और राहुल गांधी गुण गाया करते थे, आज कहते हैं, कांग्रेस को एक बड़ी सर्जरी की आवष्यकता है, आम जनता पिछले 69सालों से देखती आरही है की सत्ता की मलाई केवल नेहरू गांधी परिवार के सदस्यों को ही खिलाई जा रही है ! बीच में जनता पार्टी, जनता दल आई, कांग्रेस ने सेंध लगाई (जनता को याद होगा ७७ में कांग्रेस समाप्ति के कगार पर थी इन्द्राजी ने चरणसिंह को प्रधान मंत्री का ख्वाब दिखाया नतीजा आज सबके सामने है) ! २००४ से २०१४ तक प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह रहे, पर सत्ता का सूत्र किसके हाथ में था सारी दुनिया जानती है ! आज भाजपा आई है, ये जनता का विकास धरातल पर करके दिखाएंगे, न की कांग्रेस की तरह, बोफर्स में कमीशन, हेलीकाफ्टरों की खरीददारी में कमीशन, नेशनल हैराल्ड में घोटाला कालाधन विदेशी बैंकों में जैसे दुष्कर्म नहीं करेंगे तो आगे भी सत्ता की कुंजी जनता से पा जाएंगे ! कांग्रेसी अपनी हार का टोकरा दूसरों के सिर पर न फोड़ कर अपने सिरों पर फोड़ के देखो !

के द्वारा:

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: arungupta arungupta

आपके विचार पूर्णतः तर्कयुक्त एवं विवेकसम्मत हैं आशुतोष जी । मैं पूरी तरह सहमत हूँ आपसे । दिल्ली पुलिस का नाकारापन और ग़ैरज़िम्मेदारी आज सभी के सामने है और इसके आयुक्त भीम सेन बस्सी तथ्यों की पड़ताल करके अपने विभाग के नकेल कसने की जगह संवाददाता सम्मेलनों में बैठे-बैठे गाल बाजा रहे हैं । वे इसी बात से बेहद ख़ुश हैं कि उन्हें सूचना आयुक्त बनाया जा रहा है । चलो, एक पद जा रहा है तो दूसरा शक्तिशाली पद झोली में आ रहा है । देश का क्या है, देश तो चलता ही रहेगा । शुभकामनाएं बस्सी जी को । आप प्रसन्न रहिए । बाकी आपके पुलिस बल की आँखों के सामने ही न्याय के मंदिर में अराजक तत्व निर्दोषों को पीटें तो पीटें, आपको इससे क्या ?

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

यह दुर्भाग्य है देश का कि कोई भी अच्छी योजना लागू की जाती है उससे पूरी तरह लाभार्थी को समझया नहीं जाता I जानकारी के अभाव में खाते तो खुल गए पर उनमें रुपे कार्ड के उपयोग द्वारा लेन देन नहीं  के बराबर हैं अतः 5000 तक के ओडी और बीमा के लाभ से लोग वंचित हैं I बहुत सारे खाते अंगूठा लगाने वालों के हैं वो रुपे कार्ड का प्रयोग नहीं कर सकते Iजीरो बैलेंस खातों के जरिए विभिन्न प्रकार की सामाजिक पेंशन लाभार्थी पा रहे हैं और वर्तमान में जिन के पास एलपीजी गैस है उसकी सब्सिडी ले रहे हैं Iवर्तमान में  बैंक कर्मचारियों पर कार्य का दवाब बहुत है यदि उन पर बिना किसी ठोस योजना के कोई भी स्कीम लादी जायेगी तो उसका हश्र गोल्ड स्कीम जैसा ही होगा I जीरो बैलेंस में धन दिखाई देने के पीछे बैंक के द्वारा अपनी जीसीसी स्कीम के अंतर्गत लोन देना भी है Iबैंक 2012 से फाइनेंसियल इन्क्लुस्न का कार्य कर रहे हैं जिसमें पात्र लोगों को छोटे कर्ज उपलब्ध कराना भी है

के द्वारा: atul61 atul61

जय श्री राम डॉ.आशुतोष जी आप बीजेपी/मोदी/आरएसएस के खिलाफ और गांधी परिवार के समर्थक है इस लिए आपके विचार टीक है लेकिन कांग्रेस जब मोड जी के खिलाफ ऐसे गंदे शब्दों और राजनीती पिच्जहले १३ सालो से कर रही तब मोदीजी से ज्यादा आशा रखना बेकार है.आप ने क्या नेहरूजी की असला इतिहास पढ़ा क्या नेहरु का चरित्र टीक था?क्या किर्सी के लिए उन्होंने गांधीजी को ब्लैकमेल नहीं किया क्या वे सरदार पटेल और राजेंद्र बाबु से नाराज़ नहीं रहते और उनके अंतिम संस्कार में नहीं गए नेहरूजी बहुत घमंडी नेता थे.चीन, कश्मीर समस्या के लिए वे ज़िम्मेदार थे गाँव की दुरदर्श उन्ही के कारन हुई श्यामा पद मुकर्जी की हत्या के लिए वही ज़िम्मेदार और वंशवाद राजनीती के वही ज़िम्मेदार थे क्या कांग्रेस ने इस परिवार को छोड़ किसी अन्य नेता को कोइ मान नहीं दिया सरदार पटेल को भारत रत्ना १९९१ में मिला क्या ये सही था नरसिंहराव के साथ क्या किया सब जानते हैपटेलजी के साथ कैसा वर्ताव किया इतिहास गवाह है ..

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम जब पुरे विश्व में योग के सफल आयोजन पर देश्वशी गर्व महसूस कर रहे थे मुस्लिम वोट्स के लिए सेक्युलर ब्रिगेड जिसमे कांग्रेस ,नितीश और लालू के दल है योग का विरोध करके अपनी तूच मानसिकता दिखा दी की उन्हें देश से ज्यादा मुस्लिम वोट्स की परवाह है.कुछ मीडिया भी इसी मानसिकता से ग्रस्त है सोनिया राहुल देश से बाहर चले गए किसी मीडिया ने निंदा नहीं की परन्तु राम माधव के ट्वीट पर हंगामा कर दिया आरएसएस/बीजेपी/मोदी विरोधिओं को योग दिवस के सफल आयोजन की खबर पच नहीं पा रही इसलिए हंगामा कर रहे.बहुतो को आरएसएस/बीजेपी की निंदा करने में गर्मी में शिमला की ठंडक का अनुभव होता.आपके विचारो अनुसार अच्छा लेख.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम आशुतोष जी देश में एक चलन हो गया की किसी भी बात पर कांग्रेस,वाम दल,जद(यू),आप और इंग्लिश पेपर्स और इंडिया टुडे एक जुट हो कर बीजेपी/मोदी का विरोध करने लगते,इस बात में ३ दिन से टीवी में बहस हो रही.ललित मोदी को इंग्लैंड से पुर्तगाल जाने और वापस आने का वीसा दिलवाने के लिए कहा था क्योंकि उसकी बीबी कैंसर से पीड़ित थी और उसके पास हना चाहता था,कांग्रेस वाले इतनी नीचता पर उतर आये की २०१४ की अहमदाबाद में आईपीएल मैच की फोटो को २०१५ में दिखा रहे.येही लोग म्याम्न्नर पर आतंकवादियो के मामले भी हल्ला मचा रहे थे ये पाकिस्तान एजेंट की तरह कार्य करते योग पर भी विरोध.राहुल ४८ दिन के अग्ग्यत्वास से केवल हल्ला मचाना सीखा है.शर्म नहीं आती.

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के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

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जय श्री राम गिरराजजी ने ये टिप्पणी सार्वजनिक जगह नहीं की थी परन्तु दोस्तों के साथ ऐसे बात चीत में की थी बाते शयद बहुत कर सकते है लेकिन नाइजीरिया कहने का आशय काले रंग के लिए था क्या ये सच नहीं की काले रंग की जगह लोग गोर रंग को पसंद करते है.आजकल फैशों हो गया की कोई बोले और विवादित बयान बना दो ये बीजेपी और उनसे सम्बंधित लोगो के लिए है क्या आप सोनिया गाँधी,रेणुका चौधुरी और ममता के निम्न स्तर के अपशब्द भूल गए.मीडिया को सनसनी पैदा करने की आदत है नहीं तो इस छोटी घटना में देश में टीवी और मीडिया में २-३ दिन नहीं बर्बाद होते.हम लोग महिलाओ का आदर करते परन्तु बोलचाल में हल्की फुल्की (lighter mood ) भाषा में मजाक कर देते है.

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के द्वारा: DEEPTI SAXENA DEEPTI SAXENA

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ब्लॉग बुलेटिन की शनिवार ०९ अगस्त २०१४ की बुलेटिन -- काकोरी कांड के क्रांतिकारियों को याद करते हुए– ब्लॉग बुलेटिन -- में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... एक निवेदन--- यदि आप फेसबुक पर हैं तो कृपया ब्लॉग बुलेटिन ग्रुप से जुड़कर अपनी पोस्ट की जानकारी सबके साथ साझा करें. सादर आभार!

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

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के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

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के द्वारा: deepakbijnory deepakbijnory

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: विजय कुमार सिंघल विजय कुमार सिंघल

के द्वारा: arunsathi arunsathi

के द्वारा: sanjay kumar garg sanjay kumar garg

के द्वारा: arunsathi arunsathi

समझाइये अपने नेताओं को कि वे अब सड़कों पर नहीं सदन के अंदर जाने की स्थिति में आ चुके हैं और जिस तरह से उनका व्यवहार पल पल बदल रहा है उससे कहीं न कहीं आप के उन विरोधियों को आप के ख़िलाफ़ बातें करने का अवसर भी मिल रहा है यदि कॉंग्रेस अपनी तरफ़ से बना शर्त समर्थन मिल रहा है जो वे जहाँ तक आपका मुद्दों आधारित समर्थन किसी भी तरह से करती है तो आप को उसे स्वीकार करना चाहिए क्योंकि जब आप सड़कों पर थे तो कुछ भी कह और कर सकते थे पर जब आप सत्ता के प्रतिष्ठानों तक दस्तक देने लगते हैं तो आप को पहले से स्थापित संवैधानिक परम्पराओं का निर्वहन भी करना पड़ता है. कॉंग्रेस का समर्थन लोकसभा चुनावों तक सिर्फ इसलिए भी पक्का ही है क्योंकि उसे भाजपा विरोधी मतों को आप तक बनाये रखना है तो यदि आप इस बीच में कुछ परिवर्तन के साथ सत्ता को चलाते हैं तो आने वाले समय में उससे आप और दूसरे राजनैतिक दलों में अंतर देखने का अवसर भी जनता के पास होगा. यह सही है कि जनता को आप और आम आदमी पार्टी से बहुत आशाएं हैं पर दिल्ली जैसी पढ़ी लिखी जनता ने औसत से बहुत अच्छा काम करने वाली शीला दीक्षित को भी नहीं बख्शा है तो आप को कोई मुग़ालता भी नहीं पालना चाहिए. आगे आइये और उन वास्तविक धरातलीय चुनौतियों का सामना कीजिये और जो धन अगले चुनाव में खर्च हो सकता है उससे आम आदमी को राहत देने की कोशिशें शुरू कीजिये वर्ना ये जनता किसी को भी माफ़ नहीं करती है सभी जानते हैं. शुभकामनाएं.ही दी जा सकती हैं ऐसे में !

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के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

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के द्वारा: Sumit Sangwan Sumit Sangwan

प्रिय आशुतोष शुक्ल जी बहुत खूब अपने कश्मीरी आतंक से इशरत जहां की तुलना बहुत ही सुन्दर ढंग से की है जब कई कई जांच रिपोर्ट जो की गुजरात सरकार की स्वयं की एजेंसी के लोग यहाँ तक की उस समय की जिला मजिस्ट्रेट तमांग ने भी की है जिसमे मुठभेड़ को फर्जी बताया गया है तो आप बिना जांच के ही यह कहना चाहते है कि इशरत समेत मारे गए चारों लोग आतंक वादी थे लेकिन आप यह भूल गए कि वह इतने खूंखार आतंकी होने के बाद भी जो एक मुख्य मंत्री को मारने आये थे जो आपने साथ स्वचालित हथियार होते हुए भी अपनी रक्षा में एक भी गोली नहीं चला पाए / तो इससे तो एक ही सन्देश निकलता है कि मोदी समर्थकों अधिकारीयों को केवल एक ही बेचैनी थी कि किस प्रकार से मोदी को खुश करके अपने उल्लू सीधे किये जा सके . वैसे भी अब इस विषय को केवल कोर्ट पर ही छोड़ देना ही बेहतर होगा क्योंकि फैंसला तो कोर्ट को ही करना है और शायद आपकी बात ही सही हो जाय और कोर्ट में इशरत आतंवादी घोषित कर भी दी जाय लेकिन फिर भी फर्जी मुठभेड़ के नाम से कि गई ह्त्या का मामला तो बनेगा ही और फिर तिनका काली दाढ़ी में निकलता है कि सफ़ेद दाढ़ी में या किसी में नहीं कौन जाने ? सुंदर लेख बधाई

के द्वारा:

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

कलाकार को कला के माध्यम से अपनी बात रखने का पूरा हक़ है और कला के माध्यम से हमेशा से ही सामजिक बुराइयों और कुरीतियों पर प्रहार किए ही जाते रहे हैं पर देश में पूरे मसले को जिस तरह से राजनैतिक रंग देना शुरू कर दिया जाता है उसका कोई औचित्य नहीं है क्योंकि जब कला को इस तरह से किसी सीमा में बांधा जाता है तो वह अपने मूल स्वरुप को खो ही देती है पर साथ ही किसी ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर कुछ भी करने से पहले कलाकारों को भी इस बात पर विचार अवश्य ही कर लेना चाहिए कि इससे आने वाले समय में इसका समाज पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा ? १० - २० लोगों को किराए पर लेकर हल्ला करवाकर फिल्म का विरोध करना और अपना उल्लू सीधा करना एक फैशन सा बन गया है ! कभी कभी फिल्मकार खुद भी विरोध करवा लेता है !

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के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: सुधीर कुमार सिन्हा सुधीर कुमार सिन्हा

क्योंकि दिल्ली में उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग तैयार हो चुका है पर उस वर्ग को वोटिंग के लिए बूथों तक कैसे पहुँचाया जायगा यह अब बड़ा प्रश्न है. देश का यही दुर्भाग्य है कि जिन लोगों के हाथों में देश का भविष्य सौंप कर सुरक्षित किया जा सकता है उनको केवल घरों की बैठकों में ही समर्थन मिला करता है और जिन्हें केवल जाति- वर्ग – और धर्म की राजनीति करनी होती है उनका समर्थन सड़कों पर उतर कर वोट डालकर अपने अनुरूप प्रत्याशियों को जिता लेता है ? डॉ. आशुतोष जी , सादर नमस्कार ! आपने जो सवाल उठाये हैं वो बहुत सटीक हैं ! लेकिन मैं क्यूंकि "आप " को लगातार समर्थन कर रहा हूँ और उसके लिए समर्थन जुटा रहा हूँ उस आधार पर कह सकता हूँ की हमें बहुमत तो नहीं किन्तु एक आधार अवश्य मिलेगा ! हर अच्छी बात को फैलने में समय लगता है और समय लगने दीजिये , हम तैयार हैं !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: jlsingh jlsingh

प्रिय ब्लॉगर मित्र, हमें आपको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है साथ ही संकोच भी – विशेषकर उन ब्लॉगर्स को यह बताने में जिनके ब्लॉग इतने उच्च स्तर के हैं कि उन्हें किसी भी सूची में सम्मिलित करने से उस सूची का सम्मान बढ़ता है न कि उस ब्लॉग का – कि ITB की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगों की डाइरैक्टरी अब प्रकाशित हो चुकी है और आपका ब्लॉग उसमें सम्मिलित है। शुभकामनाओं सहित, ITB टीम पुनश्च: 1. हम कुछेक लोकप्रिय ब्लॉग्स को डाइरैक्टरी में शामिल नहीं कर पाए क्योंकि उनके कंटैंट तथा/या डिज़ाइन फूहड़ / निम्न-स्तरीय / खिजाने वाले हैं। दो-एक ब्लॉगर्स ने अपने एक ब्लॉग की सामग्री दूसरे ब्लॉग्स में डुप्लिकेट करने में डिज़ाइन की ऐसी तैसी कर रखी है। कुछ ब्लॉगर्स अपने मुँह मिया मिट्ठू बनते रहते हैं, लेकिन इस संकलन में हमने उनके ब्लॉग्स ले रखे हैं बशर्ते उनमें स्तरीय कंटैंट हो। डाइरैक्टरी में शामिल किए / नहीं किए गए ब्लॉग्स के बारे में आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा। 2. ITB के लोग ब्लॉग्स पर बहुत कम कमेंट कर पाते हैं और कमेंट तभी करते हैं जब विषय-वस्तु के प्रसंग में कुछ कहना होता है। यह कमेंट हमने यहाँ इसलिए किया क्योंकि हमें आपका ईमेल ब्लॉग में नहीं मिला। [यह भी हो सकता है कि हम ठीक से ईमेल ढूंढ नहीं पाए।] बिना प्रसंग के इस कमेंट के लिए क्षमा कीजिएगा।

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सही कहा आपने, मैं आपकी बातों से सहमत हूं। साथ ही यह कहाना चाहूंगा कि यदि हर व्यक्ति प्रयास करे तभी भ्रष्टाचार से लड़ा जा सकता है। दूसरों को तो हम भ्रष्टाचारी कह देते हैं, लेकिन कई बार हम भी शार्टकर्ट का रास्ता अपनातते हुए इसे बढ़ावा देते हैं। पहले हमें खुद को सुधारना होगा। साथ ही दिल्ली में हल्ला मचाकर कुछ नहीं होगा। इसी बात पर मुझे अपने एक मित्र जनकवि डॉ. अतुल शर्मा की कविता की ये पंक्तियां याद आती हैं- -यहां वहां जहां तहां अब लाशों की मंडी है, सारा जनमत सुलग रहा है, राजधानियां ठंडी हैं, -राजधानियां सुलगाओ, ओ शब्दों के सौदागर अब तो सड़कों पर आओ, ओ शब्दों के सौदागर

के द्वारा: bhanuprakashsharma bhanuprakashsharma

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

पिचली बार २ g मुद्दे पर भी ऐसे ही तर्क आ रहे थे की सांसद बहस न कर के बहुत घाटा कर रहे हैं... मान लेते हैं की संसद न चलने से ५० करोड़ रुपये की हानि होगी पर यदि १८६०००००००००० रुपये की जाँच बैठ जाती है तो कितना फायदा होगा ... इसी तरह हम जैसे बुद्धिमान मुर्ख २ जी पर कह रहे थे की संसद नहीं चल पा रही है पर साडी दुनिया देख रही है की उस बार २४ हज्जार करोड़ में सारा स्पेक्ट्रम बेच दिया गया पर संसद न चलने की वजह से जाँच बैठी और आज वह स्पेक्ट्रम ७ लाख करोड़ का बिक रहा है .. अब आप को इतना तो गणित आता ही होगा की देश को संसद न चलने से कितना घटा हुआ है..... मैं आपको अपने ब्लॉग पर भी आमंत्रित करता हूँ... http://www.google.co.in/url?sa=t&rct=j&q=ghumantu%20jagran&source=web&cd=5&cad=rja&ved=0CD4QFjAE&url=http%3A%2F%2Fdrbhupendra.jagranjunction.com%2F2012%2F08%2F29%2F%25E0%25A4%25AC%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25B2-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B9-%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%2597%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25B8%2F&ei=FpdBUK3fPMrPrQfSoYH4DA&usg=AFQjCNF7sOGJEeRtW4azo8X5DauNMzr_mg

के द्वारा: drbhupendra drbhupendra

के द्वारा: annurag sharma(Administrator) annurag sharma(Administrator)

के द्वारा: bharodiya bharodiya

माही कुवें में क्या गिरी ,मौका मिल गया ट्विटर पर जाने का किसी को कोस कर मन की भड़ास निकालने का !भैये ऐसी माहियें तो कई वर्षों से खुले बोर-वेलों में गिरती आई हैं और हमारा इलेक्ट्रानिक मिडिया भी खूब चटकारे लेकर क्लिप दिखाता है बिलकुल मदारी के अंदाज़ में ! साबित करता है की सपेरों-मदारियों के देश में तमाशबीनो की कोई कमी नहीं ! समस्या प्रधान इस मुल्क की हजारों समस्याएं सुरसा की मानिंद मुह बाये खड़ी हैं लेकिन मुद्दा कहाँ बनता है ? मनोरजक चैनलों पर मनोरंजन की तरह परोसी जाती हैं समस्याएं कहीं कोई प्रतिक्रिया नहीं होती किसी भी भ्रस्टाचारी को कोई सरे राह सड़क पर गोली नहीं मारता ! सब तमाशा बीन हैं ! यही वज़ह है की हमारे चैनल तीन-तीन दिन तक बोर-वेल लाईव टेलीकास्ट दिखाते है !आखिर कुछ नया तो है फिर TRP इसका भी तो ख्याल रखना है !

के द्वारा: rajuahuja rajuahuja

भाई लल्लू महाराज आपने cd देखी है क्या ?? नही देखी तो देख लीजिये.... टीवी में, पेपर में यही खबर देख रहा हूँ की सीडी के साथ छेड़ छड की गयी है.....समझ नहीं आया क्या छेड़छाड़ की गयी है??? सीडी को गौर से देखिये और बताइए की सीडी के साथ क्या छेड़ छड हुई है....क्या उसमें जो व्यक्ति है वो अभिषेक मनु सिंघवी नहीं है .... क्या उसमें वो महिला नहीं है ?? क्या वो दोनों आपत्तिजनक अवस्था में नहीं है...??? अरे भाई मुझे ये समझाओ एक ड्राईवर कितना बड़ा इंजिनियर हो गया जो उसने ऐसी सीडी बना डाली.... उसको तो ड्राईवर होना ही नहीं चहिये ...फिल्म एडिटर होना चाहिए अगर उसने सीडी के साथ छेड़ छड की है.... ये तो सोशल मीडिया है जिसके वजह से उस टकले का भंडा फोड़ हो गया...नहीं तो वो टकला कितनो को अपने बिस्तर से जज बना रहा होता.... . सोशल मीडिया जिंदाबाद !!!!!!!!!!

के द्वारा:

आपको सोशल मीडिया का एबीसी पता भी है? या ऐसे ही मुंह उठाके आर्टिकल लिख दिए? लिखने के पहले रिसर्च न सही थोड़ा इधर-उधर पढ़ तो लिया कीजिये.. आपने तो यह स्थापित भी कर दिया कि सीडी से छेड़छाड़ की गयी.. ये निष्कर्ष किस फोरेंसिक जांच के आधार पर निकाला आपने... ड्राइवर ने मान लिया इसलिए? वाह.. आपकी लोजिकल समझ का तो मैं कायल हो गया.. कल को नक्सलियों के द्वारा किडनैप किया हुआ कोई आदमी मान लेगा कि नक्सली सबसे बड़े देशभक्त हैं और उन्होंने उसकी बड़ी सेवा की तो आपलोग नक्सलियों को क्लीनचिट दे देंगे... दो कौड़ी का ड्राइवर कॉंग्रेस के प्रवक्ता और इतने बड़े वकील की फर्जी सीडी बनाता तो आपको लगता है कि वो अभी बाहर घूम रहा होता.. सिंघवी जी इतने दयालु लगते हैं आपको? और सोशल नेटवर्क को कपिल सिब्बल के पिताजी भी नियंत्रित नहीं कर सकते... इजिप्ट और लीबिया के तानाशाह नहीं कर पाए... ये टुच्चे करेंगे नियंत्रित... जरा से अलग कम्प्युटर पर बिठा दे तो लोगिन न कर पायें.. आये हैं सोशल मीडिया का विश्लेषण करने... टाइम खराब कर दिया...

के द्वारा:

शुक्ल जी, आपका यह आलेख निरपेक्ष न होकर कांग्रेस और खासकर "बिस्तर पर जजी दिलाने का वादा करने वाले" अभिसेक्स मनु सिंघवी के समर्थन में प्रवक्ताई आलेख ज्यादा हो गया है। ये सोशल मीडिया का ही दम है कि आप भी अपनी बात कह पा रहे हैं नहीं तो कितने लिक्खाड़ों को ये (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक) मीडिया वाले अवसर प्रदान करते हैं। यही वो सोशल मीडिया है जिसने निर्मल बाबा की तीसरी आंख से लोगों को जागरूक किया, नहीं तो ये (इलेक्ट्रॉनिक) मीडिया वाले पैसे लेकर अपने चैनलों पर दरबार सजाने में ही मस्त और व्यस्त थे। करोड़ों-करोड़ लेकर सिंघवी के मामले में चुप्पी बना लेने वाले इन मीडियाई भांडों-दुमछल्लों से लोगों का विश्वास उठता जा रहा है, और लोग अब सोशल मीडिया को ही अपनी सशक्त आवाज समझने और मानने लगे हैं। काटजू साहब को क्या कहें- स्वार्थ जो ना कराए वही कम है। आखिर जजी के बाद मिली प्रेस काउंसिल की अध्यक्षता का अहसान तो चुकाना ही होगा ना माता माइनो के दरबार में। ये वही काटजू साहब हैं जो नीतिश कुमार के बारे में कहते हैं कि "नीतिश ने मीडिया को बंधक बना लिया है" लेकिन उनके मुखारविंद से इसी सांघवी की रासलीला पर पैसों के बल पर स्थापित मीडियाई चुप्पी के बारे में उल्टा ही बयान देते हैं। और हां, शुक्ल जी, आपके बचकानेपन पर हँसी आती है। अगर बेचारे गरीब ड्राइवर ने सीडी को फ़र्जी ही बनाया था तो काहे आपके अभिसेक्स सिंघवी जी कोर्ट के बाहर उससे समझौता करते हैं (हालांकि सच्चाई यही है कि इस समझौते को बनाने के लिए करोड़ों खर्च किए गए)। ऐसे अभिसेक्सी लोग लोकपाल के मुद्दे वाली संसदीय समिति के अध्यक्ष बनते हैं...तो सोचिए वो लोकपाल कितनों को बिस्तर के माध्यम से राहत पहुंचाएगा, इसका सहज अनुमान किया जा सकता है। और हां जी शुक्ल जी, ये बेवकूफ बनाने वाला आलेख जाकर कांग्रेसियों को पढ़ाइए, बहुत फ़ायदे में रहेंगे।

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अच्छा हो कि पूरे प्रदेश में जनता की शिकायतें जानने के लिए अलग से सरकार का एक शिकायती पोर्टल बनाया जाये जिसमें प्रदेश के किसी भी हिस्से से कोई भी नागरिक किसी भी समस्या की शिकायत कर सके. लोग कह सकते हैं कि जब प्रदेश में कई संगठन जनता के लिए बने हुए हैं तो एक और प्रक्रिया अपनाने की क्या आवश्यकता है तो उनसे यह भी पूछा जाना चाहिए कि प्रदेश की जनता कितनी बार इस तरह से ख़ुद आगे आकर अपनी समस्या को लखनऊ तक पहुंचा सकती है ? कभी कभी जब मुख्यमंत्री बनाने का सपना आता है तब ये ख्याल सबसे पहले आता है की एक कॉल सेंटर बनाया जाये जहां हर कोई अपनी शिकायत दर्ज कर सके ! मेरी आत्मा के शब्दों को आपने लेखनी दे दी ! बहुत बहुत धन्यवाद

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आसुतोष जी बहुत अच्छे से लिखा हें आपने / आज बुखारी न केवल व्यापार में संलन हें बल्कि खुद के लाभ के लिए मुसलमानों के ठेकेदार बन गए हें / कहते हें की वो सारे मुसलमानों के ठेकेदार हें पर जागरण की ये रिपोर्ट जो ७/४ व् ८/४ /२०१२ में भी छपी हें को पद कर चोंक गया / जो निज लाभ के लिए पुरे परिवार को लाभ दिला रहा हें / लाभ न मिलने पर मुसलामानों पर अत्याचार , अन्याय और न जाने क्या जुल्म हो रहा हें कह रहा हें / दामाद जी बेहट ( सहारनपुर ) की विधान सभा सीट से ८० % मुस्लिम होते हुए व् सपा लहर होते हुए भी हार गए ये सिध्ध करता हें की ये सब कागजी शेर हें जेसे सलमान खुर्शीद वो भी २० करोड़ मुसलामानों की ठेकेदार बने थे पर धर्मपत्नी ही चुनाव हार गयी / मेरे विचार से आजम खान एक सुलझे हुए राजनेता हें / उनके बोलने का ढंग व् मर्यादा एक लाजावज हें / बुखारी जी संसद , विधान सभा सभी में परिवार की सीट चाहिए नहीं तो मुसलामानों पर जुल्म हो रहा हें की बात कहतें हें / जब भी ऐसे लोगों को निज लाभ नहीं मिलता तो ये लोग उनकी आड़ में अपना दुःख ब्यान करतें हें / मुसलमानों , जनता व् राजनेता ओ को ऐसे लालची लोगों को समझना चाहिए / तभी उनकी व् देश की बलाई हें

के द्वारा: satish3840 satish3840

शुक्ल जी , मैं आप की बात से पूरी तरह सहमत हूँ, जब सारे तंत्र फेल हो जाते हैं तब हथियार उठाना ही एक मात्र रास्ता बचता है. मैं एक सरकारी स्कूल में ४ साल से टीचर हूँ,सुरु के एक साल का बेतन आज तक नहीं मिला,कई बार विभाग को लिखा, विभाग ने कहा की अभी प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं हुआ है, हम लोग हाईकोर्ट गए कोर्ट ने ६ हफ्ते में बकाया देने का आर्डर किया फिर भी नहीं मिला, फिर कोर्ट की अवमानना का केस किया गया तब जाकर बी. एस.ए० ने s.d.i को बटन बिल बनाने को कहा. अब सत्यापन भी हो चूका है. लेकिन आज तक न तो बेतन बिल बना और न ही बकाया बेतन मिला. कारण है बेतन का २०% घूस न देना. अब हम लोग क्या करें किसके पास जाएँ मावोवाद भी एक बिकल्प है.

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आदरणीय काल्वी जी आपकी शंकायें, न तो तार्किक हैं और न ही औचित्यपूर्ण।  देश में भ्रष्टाचार की स्थिति भयावह हो चुकी है। व्यवस्था परिवर्तन आवश्यक  हो चुका है।    भ्रष्टाचार ईश्वर की तरह कण कण में व्याप्त हो चुका है। संसद में अपराधियों का अधिपत्य हो चुका है। हम सबको जाति एवं धार्मिक भेद भूलकर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की तरह एक होकर भ्रष्टाचार रूपी अंग्रेजों को भारत से भगाना है।     जनता की जागृति से नेता समाज भयभीत है। और वह अन्नादोलन को शिथिल करने के लिये अनेकानेक राजनैतिक षड़यंत्र रच रहे हैं। कभी अन्ना समर्थकों पर अनर्गल आरोप लगाना, कभी इस आन्दोलन को साम्प्रदायिक तो कभी जातिगत जामा पहनाने का असफल प्रयास करना।     इस आन्दोलन का प्रमुख उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की भी सत्ता में प्रयत्क्ष भागेदारी।      भ्रष्टाचार अपना अस्तित्व खतरे में देख कर बौखला गया है। अतः वह अपने  प्रभाव  से कुछ धार्मिक संगठनों एवं कुछ मीडिया को खरीद कर जन अस्तित्व को समाप्त करना चाहते हैं। चूँकि अब भारतीय जन नेताओं से अधिक समझदार हो चुकी है। अतः अब वह इन नेताओं के कुचक्र में नहीं फसेगी। तथा नेताओं के तथा कथित दलालों के बहकावे में नहीं आयेगी। आपसे भी निवेदन है कि इस आन्दोलन को अपना आन्दोलन समझ कर या इसी तरह का कोई अन्य आन्दोलन खड़ा करके जनता को भ्रष्टाचार के शैतान से मुक्ति दिलायें।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

अन्ना ने १६ अगस्त २०११ को जब लालकिला के रामलीला मैदान में अनशन शुरू किया था तब उनकी मांग थी कि जब तक लोकपाल कानून नहीं आएगा वे अनशन नहीं तोड़ेंगे, लेकिन लोकपाल कानून नहीं आया और अनशन तोड़ दिया , वक्त बीता अन्ना ने कुछ महीनो बाद जंतर मंतर पर धरना दिया और कहा कि शीतकालीन सत्र में लोकपाल कानून नहीं आया तो देश भर की जेल भर देंगे , शीतकालीन सत्र में भी लोकपाल कानून नहीं आया , अन्ना ने फिर पैतरा बदल और कहा कि मुंबई में तीन दिन का अनशन होगा और उसके बाद जेल भरो आन्दोलन शुरू किया जाएगा , पुरे देश कि जेलों को हम भर देंगे लेकिन अनशन में भीड़ नहीं देख अनशन के दुसरे ही दिन अन्ना को मायूसी के कारण बुखार आगया और अन्ना शर्म से बहाना करके अस्पताल पहुँच गए लेकिन लोकपाल फिर भी नहीं आया | अन्ना ने धमकी दी कि २०१२ के चुनावो में कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करेंगे , चुनाव भी पुरे होगये लेकिन लोकपाल नहीं आया | अब अन्ना इतने शर्मिंदा हो चुके हैं कि अभी से २०१४ के चुनावो का हवाला दे रहे हैं | अन्ना जी मुझे आपके वायदे पर शक है ? २०१४ तक चलते चलते आपकी सांस फूल जाएगी और इन्ना लिल्लाह भी हो सकती है |अत्रा ने फिर लगाई दिल्ली के जन्तर मन्तर मेँ एक दिन की नोटंकी, किरदार वहीँ थे पर काहानी का शीर्षक नया हैँ । धन बल भी बीजेपी की तरफ से मुहया हुआ । सुधार की बात करने वाले खुद को देश का बाप समझ बैँठेँ हैँ ! परिर्वतन समय की मांग हैँ , किन्तु अडियल रवया अपनाकर आज एक बाप अपने बच्चोँ को नहीँ सुधार सकता तो क्या बीजेपी की घीनोनी राजनिति से उत्पन हुए ये देश को नई दिशा देँ पाएगा या काम खत्म होने के बाद इसे दुध मेँ पडी किसी मक्खी की तरह फैँक दिया जाएगा ।

के द्वारा:

आदरणीय शुक्ल जी,आपने बिलकुल सही बात कही है,लेकिन प्रकारान्तर से आपने भी श्री केजरीवाल जी की बात का समर्थन किया है ।श्री केजरीवाल जी भी एक इंसान ही है । भ्रष्टाचार के विरूद्ध अपेक्षित कार्यवाही न हो पाने के क ारण,जबान फिसल गयी,लेकिन आपका यह कहना भी सही है कि यह लोग भी मर्यादित और अनुकरणीय आचरण नहीं करेगे तो इसका नुक़सान ही उठाना पड़ेगा ।सारे राजनीतिक लोगों और दलों का एक एेसा लीग बन गया है कि कोई भी भ्रष्टाचार के विरूद्ध कार्यवाही नहीं करना चाहेगा ।इसके लिए सभी समझदार लोगों को स्वयं को सुधारते हुए धैर्य के साथ राजनीतिक लोगों को सुधरने के लिए मजबूर करना पड़ेगा ।यह प्रक्रिया प्रारम्भ हो गयी है,ज़रूरत इसे जारी रखने की है ।

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मैंने ऐसा करके केवल अपने संवैधानिक उत्तरदायित्व को ही पूरा किया है क्योंकि मैं जो कुछ भी करना चाहता था वह भारत के चुनाव आयोग की मंशा के अनुसार था. आयोग भी इस बात के पक्ष में है कि ईवीएम में आखिरी बटन "इनमें से कोई नहीं" वाला हो इसके लिए आयोग ने सरकार और विधि मंत्रालय से अनुमति मांगी है. मैं आयोग की इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ क्योंकि आज जिस तरह का राजनैतिक परिदृश्य बना हुआ है उसमें इस बात की कोई गारंटी नहीं दे सकता है कि उम्मीदवार अच्छे ही होंगें ? जाति/ धर्म के आधार पर आज भी राजनैतिक दल किसी को भी टिकट पकड़ा कर जनता पर थोप देते हैं कि इनमें से ही किसी को चुनो भले ही वो फूटी आँख न सुहा रहा हो जिसका विरोध करने का यह एक वैधानिक तरीका है जो मैंने अपनाया था. मुझे आयोग की मंशा के अनुसार आख़िरी बटन चाहिए.... मैं किसी तथाकथित आन्दोलन का समर्थक नहीं हूँ मैं देश के संविधान और संवैधानिक मूल्यों का समर्थक हूँ.. परिवर्तन के लिए मांग करनी पड़ती है वह अपने आप नहीं आता है..... मैंने मांगना शुरू कर दिया है अब बाक़ियों की बारी है.....

के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

डॉ आसुतोष शुक्ल जी आपका ब्लॉग वाकई सराहनीय है /आज सही मायने में देखा जाए तो मुसलमान अल्पसंख्यक हे ही नहीं परंतु वोट की राजनीति के कारण उन्हें ये अहसास बार बार कराया जाता हें / मुसलमानों को डराकर उनसे वोट लिए जाते हैं वह प्रवृत्ति देश और समाज के लिए घातक है. देश में ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध आदि वास्तव में अल्पसंख्यक हैं पर वे कभी भी सरकार पर भेदभाव का आरोप नहीं लगाते हें / आप का कहना एक दम सत्य हे , आपने इसका उत्तर खुद ही दे दिया इनमें शिक्षा का प्रचार प्रसार / मजे के बात बताऊँ , हमारे दफ्तर में एक सरदार जी काम करतें हें जब हमने उन्हें बताया कि वो अल्पसंख्यक हें तो वो चोंक गए बोले वो अपने को अल्पसंख्यक किस एंगल से लगे / आज यदि शिक्षा का प्रचार प्रसार इस समाज में हो जाए तो ये देश में सबसे ज्यादा नोकरी देने वाला व्यापारी वर्ग बन जाए / न इसे आरक्षण की जरुरत होगी न ही अल्पसंख्यक शब्द के तमगे की / शायद देश की कुछ पार्टियाँ ये ही नहीं चाहती / इसी लिए ये उनको उलझाये रखना चाहती हें / आपका ये साहसिक ब्लॉग लिखने के लिए बधाई

के द्वारा: satish3840 satish3840

के द्वारा: vijariyo vijariyo

शुकलाभाई दलित नीति समजमें नही आती है । लेना है तो मैं दलित, मै दलित । सपना है बिन दलित का । राह चलते दलित को दलित कह के पूकारो, पडती है थप्पड । सरकारी किताबें भरी पडी है तू दलित, ये दलित, वो दलित । कुत्ते की तरह नेता भौंके, आव दलित , आव दलित । बिन दलितों को नौकरी पर रखने की हैसियत रखनेवाला उद्योगपति, फिर भी है दलित ? बिन दलित चमचों की हैसियत रखनेवाला पासवान भी है दलित ? अडिडास के सेठ से पूछो क्या हो तुम दलित ? थप्पड मार कर भगा देगा टाटा हो या बाटा । शुकला जी, टाटा कंपनी से काम मागें वो धनिक ही हो सकता है । वो दलित के लेबल से दूर ही रहना चाहेन्गे, उसे थोडे वोट की जरूरत है, जो किया अपने बलबूते किया । लेकिन ऐसे स्वाभिमानी वर्ग को भी जातिवाद के चक्करमें लाने की कोशीश है । वो क्यों भिखमंगों की तरह नीची मुंडी करे । और टाटा को क्या समजते हो ? गरिब, दलित, नमक के छोटे व्यापारियों का धंधा ही छीन लिया । आठ आनाका नमक पांच रूपये में बेचता है । सरकार को दलाली दी, जबरदस्ति आयोडिन का मामला लाया । सदियों तक पूरखों को आयोडिन की जरूरत ना पडी । कोंग्रेस आई तो आयोडिन की जरूरत आई ? निरा राडिया और टाटा की प्रेम कहानी आपने सुनी होती तो आप को भी मालुम पडता, टाटा और सरकार एक है और जातिवाद का कार्ड टाटाने भी उठाया है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

प्रिय शुक्ल जी , नमस्कार ,टीम अन्ना का जो हश्र हम देख रहे है यह संभावित था !इसके पीछे कई कारण हैं, सबसे बड़ी वजह आन्दोलन को मिली अप्रत्याशित सफलता को टीम अन्ना के सदस्य हज़म नहीं कर पाए,कुछ लोग इसमें स्वयं को आगे देखने लगे ,तो कुछ को यह रास नहीं आया कुछ क्षद- वेशधारी भी जा घुसे ,जो बाद में पहचाने भी गए ! फिर सत्ता से टकराव में राजनीति अपने निम्नतम स्तर पर आ गई !एक-एक को अलग -अलग कर नंगा किया गया ,जब की सत्ताधारी इस से अछूते नहीं ! यूँ तो फिरंगियों के विरुद्ध ,स्वतंत्रता संग्राम में गाँधी ,नेहरू पर भी आरोप लगे , गाँधी को मुस्लिम परस्त तक कहा गया !फिर जिन्ना-नेहरू की महत्वकान्षा किससे छुपी थी ! लेकिन वो लोग अपने ध्येय से डिगे नहीं !इस युग में दूध का धुला कोई नहीं ,देश का हर शक्स कहीं न कहीं गलत है,और होगा भी ! इन्सान जो ठहरा ,मानवीय कमजोरियां तो होंगी ही वर्ना देव-तुल्य नहीं हो जाता ! कुल मिलाकर हर अच्छे कार्य में बाधाएं आती हैं !जिनका मुकाबला धेर्य से करने की ज़रूरत है न की भावना के अतिरेक में !

के द्वारा: rajuahuja rajuahuja

के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

के द्वारा: anoop pandey anoop pandey

भाई साहब,बहुत अच्छा लिखा है,आपको बधाई!! परन्तु अभी आपको शायद यह नही पता होगा की उत्तर प्रदेश की जनता का इलाज की डाक्टरों द्वारा होता है/ जिस दिन आपको पता लग गया तो समझो आपकी रातों की नींद हराम हो जाएगी/ कभी अपने उत्तर प्रदेश के प्राईवेट मेडिकल और डेंटल कोलिजों की स्थति देखि है जिस दिन आप वहां के इलाज का स्टार देख लेंगे घर पहुँचने से पहले अपने खून की जाँच करवाएंगे की कहीं कोई बीमारी वहां से साथ न ले आयें हों/ खुले आम डोनेशन से MBBS BDS MDS MD की सीटें बिकती हैं और इनके बाकयेदे दलाल भी हैं जिनके विज्ञापन आप रोजाना अख़बार में देख भी सकते हैं/ कभी पश्चमी उत्तर प्रदेश के प्राईवेट डेंटल कोलिज देख लेने का सुनहरा अवसर मिले तो अवश्य देख लें और सोचना की क्या मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी नही बनती है की इनकी सत्यता जांचें की इनको मान्यता कैसे मिली,क्या केन्द्रीय स्वास्थय मंत्री को केवल रिश्वत से ही मतलब है

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सरफ़राज़ आलम - सोनभद्र, उत्तर प्रदेश दिग्विजय जी के बयान से तो यही लगता है की कांग्रेस तो विरोध कर ही रही है साथ में कांग्रेस बीजेपी सपा विहिप बिसपी से जुड़े सभी भ्रस्त लोग का काम आसान कर रही है, क्यों की इसी तरह की लोग खुद ही नहीं चाहते की काले धन पर और भरस्ताचार पर कुछ सकारात्मक रिजल्ट आये. ठीक इसी तरह का मामला उस समय आया था जब आरक्छन के मुद्दे पर १० साल के बाद दोबारा १० साल के लिए आगे बढ़ने की बात ई तो कांग्रेस ने सबसे पहले अपने तरफ से हरी झंडी दे दी, उसके बाद किसी भी नेता और पार्टी के लोग कुछ नहीं बोले क्यों की वोह जानते थे की यह राजनीती की एक जलती आग है और इसमें कुछ फेर बदल की बारे में अगर कुछ बयान दिया जाएगा तो यह पार्टी के हित में नहीं होगा और वोते का बेस खिसकने लगेगा. बाबा राम देव की आन्दोलन में संघ, आर एस एस का आने तो साजिस के तहत आन्दोलन को और कमजोर करना था , क्यों की कुछ लोग यही चाहते थे. किसी तरह से इस आन्दोलन में विवाद हो गलती के लिए छमा करें

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आपको लगता है कि , बाकी इमानदारी छोड़ भी दें तो केवल अपने पेशे के साथ ही ईमानदारी बरतने वाला कोई भी पेशे वाला व्यक्ति अरबपति या करोड़ों का स्वामी हो सकता है | उन्हें नोएडा में या कहीं भी इस उम्र में जमीन खरीदने की जरुरत ही क्याथी ? क्या उनके पास रहने को मकान नहीं था | प्लाट भी उस सरकार से जिसके खिलाफ वो केस लड़ रहे थे | ये भारत के इलितों का हमाम है , जिसमें सब नंगे नहा रहे हैं | उसके बाहर के लोग तो इसलिए नंगे नहा रहे हैं कि उनके पास पहनने को कुछ नहीं है | संपन्न और मध्य वर्ग के नीचे सत्तर करोड़ और हैं | क्या टू - जी का घोटाला नहीं होता और वो सारा पैसा सरकार के पास आ जाता तो इन सत्तर करोड़ पर खर्च होता ? धुंआ है तो कहीं आग भी होगी |

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डा साहब आज से 13 -14 वर्ष पूर्व की घटना है जब मै 16 वर्ष का था . हमउम्र मित्रो का साथ था खेलना और पढाई ये ही काम था... हमारी कालोनी की 100 मीटर सड़क मिटटी की थी बरसात में नारकीय स्थिति हो जाती थी .. कई बार उसे बनवाने के प्रयास हुए पर कोई इतने छोटे काम को करवाना नहीं चाहता था... अंत में हम लडको ने ही कालोनी के लोगो से चन्दा मांगकर उस समय लगभग ६ हजार रूपए इकठ्ठा किये खुद फावड़ा और कढ़ाही उठाली.. मिटटी रबिश ..और छाई मंगवाकर पूरी सड़क को बराबर किया और बरसात से पहले आने जाने लायक बना दिया .. हा ये अलग बात है की हम्मे से अधिकतर लड़के आरामतलब थे कभी ऐसा काम नहीं किया था और फावड़ा चलने में लगभग सबके हाथ छिल गए थे ...पर जोश तो जोश है.. बाद में सड़क देखकर आनंद आ गया ..अब तो वो सड़क पिच रोड बन चुकी है पर जब उसे देखता हु तो अच्छा लगता है ...आपने जो घटना यहाँ बताई उसे पढ़कर पुराणी याद ताजा हो गई ...अगर हम केवल अपनी छोटी छोटी सामाजिक जिम्मेदारियों को ही निभाना सीख जाये तो ऐसे तमाम उदाहरण बना सकते है जैसा की बरेली में हुआ ..और ठीक से याद नहीं आ रहा है पर शायद राजस्थान या मध्य प्रदेश में कही किसानो ने खुद ही मिलकर नाहर खोद डाली और अपने खेतो को पानी की व्यवस्था कर दी .... जय हिंद

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के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

भारत में आरक्छन सामाजिक समरसता के लिए केवल 10 वर्षो के लिए मिला था लेकेन वोट के लोभी नेताओ ने इसे नासूर बना दिया हैं ! आज हमारे देश में सब को आरक्छन चाहिए देश का प्रतिभा भार में जाये इससे किसी को कुछ लेना देना नहीं हैं ! जो OBC हैं उसे SC या ST का आराक्चन चाहिए, जिसको आरक्छन नहीं हैं उसे OBC का आरक्छन चाहिए ! वानिया, जाट जैसा आमिर संपन जाती को भी देश के बिहार ,राजस्थान और आन्य राज्यों में हैं ! आज देश को जरुरत हैं की देश का 70 % सीट कम-से-कम जनरल हो और 30 % सीट ज्यादा-से-ज्यदा गरीबी एक लाख से कम आमदनी वाले परिवार के लिए आराक्छित कर दे ! जिससे आरक्छन का सही उपयोग हो, नहीं तो कारोर पति लोग ही आरक्छन का लाभ उठाते रहेंगे और जिसके फ़ायदा कभी भी भारत के गरीब लोग को नहीं मिलेगा आज ...............

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आशुतोष जी आपका कथन बिलकुल सही ऐसा लगता है की उत्तर प्रदेश में कोई सरकार तो है नहीं केवल राजा राज कर्मचारी और प्रजा है ---दैनिक जागरण में एक समाचार के अनुसार ---- उत्तर प्रदेश की 16 जनपदों में " रोजाना 20 करोड़ की अवैध वसूली " प्रदेश में एक अप्रेल 2009 से लागू शराब नीति के अंतर्गत वेस्ट उत्तर प्रदेश में के 16 जिलों में उत्तर प्रदेश शुगर फैडरेशन के नाम पर ठेका छोड़ा गया , जिसमे - मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, बिजनौर, बागपत, बुलंदशहर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली , पीलीभीत , बदायूं, शाहजहांपुर, नोएडा, जेपी नगर ,आदि जिले शामिल है, जबसे इस निजी कंपनी को ठेका मिला है मानो अवैध वसूली का प्रमाण पत्र ही मिल गया हो, इन जनपदों में शराब का ऐसा कोई ठेका नहीं है जहाँ पर शराब की प्रत्येक बोतल पर अंकित कीमत ( एम्.आर.पी.) पर 15 से 20 प्रतिशत अधिक कीमत वसूली न की जा रही हो | अकेले मेरठ जिले में ही 204 दुकाने 28 माडल शाप एवं 12 बार अलग से हैं जहाँ औसतन 17 करोड़ रूपये रोजाना की बिक्री होती है इस प्रकार से लगभग 1 .60 करोड़ रूपये रोज की अवैध वसूली धड़ल्ले से हो रही है | इस प्रकार से 16 जिलों में औसतन रोजाना 245 करोड़ की शराब बेचीं जाती है (जिसमे औसतन बीस करोड़ रूपये की अवैध वसूली भी शामिल है ) अगर सरकारी अधिकारियों की बात की जाय तो वह यह कर पीछा छुड़ा लेते है की अगर कोई शिकयत होगी तो कार्यवाही करेंगे | गरीब व्यक्ति के लिए शराब पीना तो वैसे ही एक सामाजिक बुराई है पर संपन्न लोग भी बीस पचास रूपये अधिक पेमेंट कर के शराब खरीदने में कोई बुराई नहीं समझते , शायद इसी लिए उत्तर प्रदेश की सरकार ने भी ठेकेदारों को खुली छुट देकर अपना हिस्सा भी इस लूट में सु-निशित कर लिया है क्योंकि ठेके पर बैठे सेल्स मैंन भी यही कहते है की कहीं भी शिकायत कर लो हम तो एम् आर पी से अधिक पैसे लेंगे | चूँकि यह एक प्रशासनिक समस्या है जिसमे केंद्रीय कानून के तहत प्रत्येक पैक सामान पर उसकी अधिकतम खुदरा मूल्य (टेक्स सहित ) अंकित किया जाना अनिवार्य है और अंकित मूल्य से अधिक कीमत वसूलना कानूनी अपराध के श्रेणी में आता है तो फिर उत्तर प्रदेश में यह खुली लूट क्योंकर हो रही है | क्योंकि इस अवीध वसूली में कहीं न कहीं सरकार की मिली भगत नजर आ रही है ? -------------

के द्वारा:

आशुतोष जी आप का कहना बिलकुल जायज़ है . करमापा के पास करोड़ों की विदेशी मुद्रा का मिलना एक खतरे की घण्टी है. आज देश की अधिकतर आबादी गरीबी में खप रही है वहां ऐसे धर्म गुरु बेतहाशा धन दौलत के स्वामी बने गुलछर्रे उड़ाते दिख जाते हैं. महंगी गाड़ियों में सवार हो कर धूल उड़ाते हुए गुज़रना इन की फितरत है. करमापा के मामले में भी इस बात से इंकार नही किया जा सकता कि वो चीन के एजेंट नही हो सकते. जो कला धन उन के पास से बरामद हुआ है उस का इस्तेमाल आपराधिक और आतंकवादी गतिविधियों में होने से इंकार नही किया जा सकता. प्रशासन की नाक के नीचे ही यह सब खेल खेला जाता है क्यों कि इस मामले में कई प्रशासनिक अधिकारीयों के लिप्त होने की आशंका है. अभी कई राज़   खुलने बाकी हैं. देखते है आगे क्या होता है... R. K. Telangba rktelebaba@gmail.com

के द्वारा: rktelangba rktelangba

हमारी व्यवस्था असफल हो चकी है. पहले मुख्यमंत्री की शासन व्यवस्था चलती थी पर राज्याल से शिकायत का असर था. अब सब जानते हैं कि राज्यपाल के पास क्या सत्ता है...! प्रधानमंत्री की व्यवस्था थी पर राष्ट्रपति का मान था. लोकसभा के प्रति जवाबदेही थी. अब प्रधानमंत्री को चुनाव जीतना ही नहीं है, राष्ट्रपति से शिकायत करें तो उनका मान है कि नहीं आप सब बताएं... ? जिस दल के नेता को प्रधानमंत्री बिना बने सत्ता चलानी है उसकी आवाज़ जनता को सुनाए ही नहीं पड़ती, वह महोदया केवल चुनाव के पहले वोट मांगती हैं. उनके सुपुत्र की सत्ता भी तय है ऐसा उनके दल वाले सोच कर आनंदमग्न हैं . ऐसी स्थिति में निरीह सामान्य जन का कोई नहीं है. अब सामान्य जन को इन विशिष्ट जनों से मुक्ति पा एक नए नेतृत्व की खोज करनी होगी....!

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सूर्य प्रकाश जी वाकई घर वालों को सुधारने की जिम्मेदारी भी घर वालों की होती है लेकिन घरवालों को भी अन्दर की बातें अन्दर ही रखनी चाहिए अगर आप की लड़ाई जग जाहिर होगी तो कोई भी आपकी इज्जत नहीं करेगा आपकी कालोनी में दो भाई अगर लड़ते लड़ते सड़क पर आ जाये तो आप उसकी इज्जत करोगे क्या? अमेरिका हमारी इसी कमजोरी का फायदा उठा रहा है उसे पता है भारतीय नेताओं की स्थति क्या है इतना सब होने के बाद भी किसी भी राजनेता ने अमेरिका की इस हरक़त पर टिपण्णी की है क्या ? अगर एक जुट होकर संसद में इस सारी हरक़त की निंदा की जाती तो शायद एक कड़ा सन्देश जाता पर इन सब के लिए किसे फुर्सत है संसद की स्थति आपके सामने है रही बात जो शुक्ल जी ने जो यहाँ लिखी है की राजनयिकों को कह दिया है केवल औपचारिकता मात्र है इससे अमेरिका को कोई फरक नहीं पड़ने वाला ये सब पहले भी किया जा चूका है ! रही बात दर्द की तो अगर आप ये समझते है की केवल कहने से ही दर्द होने का पता चलता है तो आप गलत समझते है कुछ लोग ऐसे होते है जिन्हें दर्द तो होता है पर उसे पी जाते है क्योकि उसकी कोई दवा नहीं होती ! केवल भारत माता की जय बोलने वाले ही भारतीय नहीं होते है, हम भी भारतीय है आशुतोष दा

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आशुतोष जी आपकी भावनाएं पढ़कर हमेशा ही एक सुखद अनुभव होता है की आज भी आप जैसे लोग देश के प्रति सोचते हैं........... पर जहाँ तक कपिल सिब्बल साहब का प्रश्न है.......... इन पर मुझे थोडा संशय है......... वास्तव में इसका सीधा सा कारन है.........एक बार सिब्बल साहब का एक वक्तव्य आया था......... IIT के प्रवेश के लिए अंको की प्रतिशतता निश्चित कर दी जाये............ और उसके शायद लिए 70% या अधिक अंक बारहवीं में अनिवार्य किये जाना तय था......... पर कई राज्यों के बोर्ड जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार इतने मुशिकल हैं की वहां 80 % पर बोर्ड टापर बन सकते हैं............ और वहां के बच्चे ही IIT जैसी परीक्षाओं में सफल होते हैं............ तो एक तरह से ये किसी राज्य के बच्चों को प्रतियोगिता से बहार करने जैसा फैसला नहीं है............. आप जैसे भावुक राष्ट्रप्रेमियों का इस देश के नेता शोषण करते रहे हैं....... सिब्बल साहब का प्रयास कैसा रहता है ये तो भविष्य जाने पर आपका प्रयास सराहनीय है............ बधाई...........

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

गुजरात में जो कुछ अच्छा हो रहा है उसकी सदैव सराहना ही की है मैंने गुजरात देश से बड़ा नहीं हो सकता है... नरेन्द्र मोदी के बारे में जो कुछ भी सोनिया ने कहा वह उनकी २००२ की भूमिका के बारे में थीं ? हिंदुवादियों के अनुसार वह जनजागरण था तो मुस्लिम परस्तों के अनुसार नरसंहार ? १९४७ में जो कुछ मुसलमानों ने भारत आते निहत्थे सिखों के साथ किया वह भी इसी तरह था.... मैं राजनैतिक नहीं हूँ पर जब इन दोनों ध्रुवों से हटकर सोचा जायेगा तभी इन सभी बातों का जवाब मिल जायेगा ? इस तरह के भाजपा और कांग्रेस के मसले में मुझे कुछ लेना देना नहीं है मेरा कहना सिर्फ इतना है कि पूरी भारतीय राजनीति इतनी मानसिक दीवालिया हो गयी है कि नीतियों का स्थान व्यक्तिगत आक्षेप ले चुके हिं जो कि किसी भी दल के लिए शर्मनाक है......

के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

आप सभी लोगों को आप की टिप्पणियों के लए बहुत बहुत धन्यवाद. यदि सुदर्शन ठीक हैं तो खुद संघ ने उनके बयान से पीछा क्यों छुड़ा लिया भाजपा भी यह उनका निजी मत मान रही है ? क्या भारतीय संस्कृति इस तरह के बयानों के लिए हमें बताती है ? यहाँ पर किसी व्यक्ति विशेष की बात नहीं है आज यहाँ पर सुदर्शन और सोनिया हैं तो कल कोई दूसरे थे और आने वाले समय में कोई दूसरे होंगें ? कृपया इन पोस्टों को अपनी राजनैतिक विचारधारा और दृष्टि से हटकर ही पढ़ें और तब बताएं की क्या होना चाहिए ? देश के सभी राजनैतिक और सामाजिक संतान हमारे अपने हैं पर इस तरह के किसी भी मामले पर हम भारत की छवि से ज्यादा किसी व्यक्ति की छवि को क्यों महत्त्व देना चाहते हैं ? देश है तो ये घटिया नेता हैं वरना इनको कौन पूछेगा ? हाँ बात खटकती तब है जब सोनिया जैसों पर संघ जैसे वैचारिक संगठन का कोई पूर्व प्रमुख इस तरह के आरोप लगाता है ? अगर यह बात कोई निचले स्तर का नेता कहता तो बात कब की आई गयी हो गयी थी ? वैसे अनजाने में सुदर्शन ने संसद में कांग्रेस की राह आसान कर दी है ? कहीं मुलायम की बात सही तो नहीं की भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे की हितों का ध्यान रखते हैं ?

के द्वारा: डॉ आशुतोष शुक्ल डॉ आशुतोष शुक्ल

धुआ वही उठता है, जहा आग होती है, ये सही है, कि सोनिया गाँधी के खिलाफ कोई बोलता है तो मीडिया, कांग्रेस, सीबीआई को परेशानी होती है, माफिया को भी परेशानी होती है, क्यों ? क्या ये अभिवक्ति की आजादी नहीं है, या सिर्फ मायावती गाँधी को गाली दे, पागल चित्रकार हिन्दू देवी-देवता या भारत माँ का नंगा चित्र बनाये, सोनिया मोदी को गाली दे, राहुल गाँधी, लालू, मुलायम सिंह यादव, किसी को भी कुछ कह सकते है, माफ़ कीजिये सिर्फ हिन्दू के विरोध में तो ये, अभिवक्ति की आजादी है, मै ये मानता हु की भारत में सिर्फ हिन्दू होना जुर्म है, मेरी तो भारत सरकार से ये मांग है, कि देश में जो भी कानून है, उस में ये प्रावधान होना चाहिये कि ये कानून सिर्फ हिन्दुओ के लिये है, हिन्दुओ के आलावा किसी और पर ये लागु नहीं होता, हिन्दू को इस देश में ही नहीं दुनिया में कोई अधिकार प्राप्त नहीं है.

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जब बिना आधार के आर.आर.एस.के लोगो को आतंकवादी घोषित केर अदालत की बात होती है कि इसे अदालत को निपटने दोजिये तो फिर इसको भी अदालत में चुनुओती दी जनि चाहिए और उसके निर्दय की प्रतीचा करनी चाहिए क्योकि चरित्र के मामले में इस खंडन के बारे में बहुत कुछ एम्.ओ.मथाई तथा तमाम विदेशी लोगो ने लिखा है.लेकिन कभी इनका खंडन किसी ने नहीं किया कोयोत्रोची से भी रहस्यमय संबंधो के बारे में ख़ामोशी ही रही किराए के भादो को चाहिए की महँ त्यागिनी सन्यासिनी भी अपना मुखारविंद खोले कुछ तो बोले या उनके नाम पैर भाड़े के टट्टू जिन्हें अपनी वल्दियत नहीं मालूम वाही हंगामा करेगे.अरे भाई लाओ मानहानि अ मुक़दमा दायर करो तबतक इन्ही आरोपों के साथ रहो जबतक फासला नहीं हो जाता,यही तो तुमलोग इन्द्रेश जी के साथ केर रहे हो.अपने बार मिओर्ची क्य्प्लग रही है.

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डॉ. आशुतोष जी, आपकी पोस्ट पढ़कर बेहद प्रसन्नता होती है क्योंकि आपकी हर धड़कन भारत के लिए है और आपके लेखों से ये साफ़ झलकता है| इस पोस्ट को पढने के बाद लगा जैसे आपकी निष्ठा भारत को छोड़कर किसी एक व्यक्ति विशेष तक सिमट गई और पहली ही प्रतिक्रिया में श्री सिंह ने आपके यक्ष प्रश्न का उत्तर भी दे दिया है अर्थात अब कुछ और याद दिलाने की आवश्यकता शेष नहीं रह जाती है| भारत को आप भारतीय जनमानस मानकर लिखते रहे हैं और आपका वही विचार मेरी नज़र में भी सही है| भारत न तो सुदर्शन हैं और न सोनिया लेकिन मुझे तो लगता है कि इस मामले में भारतीय जनमानस की आवाज़ आज सुदर्शन और मोदी के साथ है न कि सोनिया के साथ| आपकी दूसरी गलती शायद इसी लिए आप से हुई है देखिये आज आपकी पोस्ट में आपका सूक्त वाक्य 'मेरी हर धड़कन भारत के लिए है' अनजाने में ही छूट गया है| वन्दे-मातरम्!

के द्वारा: chaatak chaatak

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? कोई देव नहीं आएगा, अब खुद ही तुल जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा|| केहरी के गह्वर में गर्जन, अरि-ललकार सुनी कितने जन? भेंड, भेड़िया बनकर आया, जिसका खाया,उसका गाया| मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में, यह दुश्चक्र मिटाना होगा| नंदा-दीप जलाना होगा| नयनों से भी नहीं दीखता, जो हँसता था आज चीखता| घरियालों के नेत्र ताकते, कई शतक हम रहे झांकते| रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि, नहीं, गरमाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा ||..................................मनोज कुमार सिंह ''मयंक'' आदरणीय आशुतोष जी, आपको और आपके सारे परिवार को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं || वन्देमातरम

के द्वारा: atharvavedamanoj atharvavedamanoj

के द्वारा: SUNEEL PATHAK SUNEEL PATHAK

डॉ आशुतोष शुक्ल रग, आपकी बात बिलकुल सही है की अगर सरकार सच में इमानदार हो तो फिर ये हेल्प लाइन का फायदा है | पर अफ़सोस की ये सिर्फ एक धोखा व् दिखावे के अलावा कुछ नहीं | ये सब नाटक अभी संपन हुआ भ्रष्ट मंडल खेलो में हुआ व्यापक भ्रष्टाचार की तरफ से ध्यान हटाने के लिए हुआ है | जब सब कुछ सरकार की नाक के निचे हुआ तो अब ये नाटक क्यों |सिर्फ जनता को बताने के लिए की सरकार कुछ कर रही है | सिर्फ नाटक है जब तक जनता भूल न जाये | जनता का क्या है , जब एक और बड़ा घोटाला होगा , जनता इस घोटाले को भूल जायगी | जनता का ध्यान इन सबसे हटाने के लिए और भी बहुत कुछ होगा | शरुआत हो चुकी है | कुछ खबरे देख सकते है | गुजरात में इस्तेमाल हुई ईवीएम हमारी नहीं थीं| ( ये बात अब क्यों बता रहे है , इलेक्शन से पहले क्यों नहीं कही ,क्योकि तब उम्दीद नहीं थी की हार जायंगे |) आरएसएस पर निगरानी की जरूरत: रीता( सही बात है -निगरानी की जरूरत तो आरएसएस को है , नाक के निचे दिल्ली में घोटाला होता है , या कश्मीर से देशद्रोही दिल्ली आकर खुले आम धमकाते है , उनकी निगरानी की जरुरत नहीं है | सभी भारतीयों से निवेदन है की इस छलावे में न आये

के द्वारा: bharatswabhiman bharatswabhiman

शुक्ल जी, गंभीर विषय उठाने पर बधाई, महोदय गिलानी और इनके जैसे बहुत से नेता कुंठित लोगो की जमात के लोग है जैसे यासीन मालिक, मीर वायज यह लोग कुँए के मेंढक जैसे हैं क्योंकि इनकी देखने सुनाने की शक्ति पाकिस्तान द्वारा संचालित की जाती इस कारन इन्हें \ रही सही कसर पी डी पी के नेता पूरी कर देते हैं वह लोग जब सत्ता में होते हैं तो उनके हिसाब से घाटी मे सबकुछ सामान्य रहता है जब वह लोग सत्ता से हट जाते हैं तो तरह तरह के आरोप लगते हैं तथा अलगाव वादियों का साथ देने लगते हैं, जब कांग्रेस पुरे देश में ही विभिन्न तरह के प्रयोग कर रही है तो उसे कश्मीर घाटी में भी एक अभिनव प्रयोग लेना चाहिए की हर बार की तरह इस बार भी केवल एक समय के लिए इन अलगाव वादियों को भी सत्ता की बागडोर थमा देनी चाहिए फिर देखिये वहां क्या होता है /

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आदरणीय डा. आशुतोष जी, साईबर कैफे से जागरण जंक्‍शन को देखने के कारण मैं बड़ी कठिनाई से आपकी पोस्‍ट तक पहूँच पाया हूँ । आज टिप्‍पणी लिखनें का सौभाग्‍य भी मिल गया है । क्‍योंकि कभी समय समाप्‍त तो कभी नेट पर टिप्‍पणी लिखनें के बाद भी अस्‍वीकृति । खैर बात आपकी पोस्‍ट की । मैं आपकी बात में आपके साथ हूँ । आपनें उचित ही लिखा हैं कि -- आइये हम सब भारत वासी इस बात का संकल्प लें कि इन खेलों के दौरान पूरी तरह से सतर्क रहेंगें और कभी भी किसी भी संदिग्ध व्यक्ति से होने वाले हर खतरे के प्रति सचेत रहेंगें. केवल हमारी सतर्कता और सहयोग ही इन खेलों के दौरान हमारी छवि को प्रस्तुत करने में सहायक होंगी. मीडिया से भी रचनात्मक सहयोग की अपील कि वह भी संयम के साथ काम करे और भारत में आ चुनके विदेशी खिलाडियों के मन में कोई नकारात्मक छवि बनाने का काम अब बंद कर दे. क्‍योंकि मेरी हर धड़कन भारत के लिए है… अब जब बारात द्वारे पर आ ही गई है तो मन से मैल को निकाल स्‍वागत में जुट घर की अच्‍छी छवि तो बनानी ही होगी । अरविन्‍द पारीक

के द्वारा: bhaijikahin by ARVIND PAREEK bhaijikahin by ARVIND PAREEK

अभी आज के अखबारों में कश्मीर के विषय में एक समाचार छपा है की सुरक्षा बलों पर पत्थर फैंकने वालो की दिहाड़ी चार सौ रुपये से बढ़ा आठ सौ रुपये हो गई है और यह सब पैसा पकिस्तान के द्वारा दिया जा रहा है अलगाव वादी नेतओं के माध्यम से \\ अत; आप का यह कथन ------- जो कश्मीर अपने खर्चे नहीं चला सकता है वह इतनी बड़ी बातें किस तरह से सकता है ? जब चार पैसे कमाने का समय होता है तो पिछले ३ सालों से वो हाथों से काम करने के स्थान पर पत्थर उठाये घूमता है ? बिना बात की बात पर आँखों में खून और दिल में नफ़रत लिए रहता है ? कभी इन लोगों ने पाक अधिकृत कश्मीर की हालत नहीं देखी है इसलिए ही तो अलगाव वाद और पाक में मिलने की बातें की जाती हैं. -----तो जब बेकार आदमी को एक दिन के लिए आठ सौ रुपये मिल रहें हों तो वह काम क्योंकर करेगा दूसरी बात यह की शातिर लोगों ने पत्थर मारने को धार्मिक कर्म से भी जोड़ दिया है तो आप सोंचो की अंजाम क्या होगा ---- यहाँ केवल एक विकल्प है की या तो रोजगार के इतने साधन दिए जायें की हर व्यक्ति काम से लग जाय या फिर एक बार पूरी शक्ति से केवल उग्रवादी नेताओ को जेल में दाल दिया जाय जब तक उनकी बुद्धि ठिकाने न आ जाय (जो की टोटल करने पर 100 से अधिक नहीं होंगे) वैसे भी कश्मीर समस्या का हल कश्मीर में नहीं है इसके लिए तो हमें अपने नापाक पडोसी पाकिस्तान की रीड एक बार और तोड़नी होगी अन्यथा या सब ऐसे ही चलता रहेगा.

के द्वारा: s p singh s p singh

डॉ आशुतोष शुक्ल जी, आपके लेख की कई बातों से सहमत हूँ पर सबसे नहीं............ आईआईटी प्रवेश परीक्षा में १२ वीं के नंबरों को भी महत्त्व देने की बात कहीं से सही नहीं है......... एक और CBSE, ICSE, या अन्य बोर्ड है जहाँ औसत अंक प्रतिशत 82 रहता है.......... और दूसरी और U.P व उत्तराखंड बोर्ड में ये अंक प्रतिशत बोर्ड टोपर के हैं............ और हर बार आप पिछले आकडे देखें तो IIT व अन्य प्रवेश परीक्षाओं में इन बोर्डस के कम प्रतिशत वाले बच्चे निकलते है.......... तो क्यों किसी की १२ वीं की कमजोरी के कारन उसका जीवन बर्बाद किया जाये.......... मौका सबको बराबर mile .............. फिर जो काबिल हो चाहे वो ३३ प्रतिशत वाला हो उसको एडमिशन दिया जाये......... अच्छा लेख……………….. हार्दिक बधाई…………….. http://piyushpantg.jagranjunction.com

के द्वारा: Piyush Pant Piyush Pant

डॉ साहब ,,ये वास्तव में गंभीर समस्या है .. भारत के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी.. हम सभी जानते है की पकिस्तान एक विफल राष्ट्र है.. उसके लिए निष्ठां जैसे शब्द बेमानी है.. चाहे वह अमेरिका के प्रति ही क्यों न हो.. और चीन की चतुराई का अनुभव हम कर चुके है.. लिहाजा ये तय है की इस गठजोड़ से नए समीकरण बनेगे और ये भी तय है की वे भारत के लिए खतरनाक होंगे.. यहाँ अमेरिका का कदम निर्णायक होगा .भारत के लिए परिस्थितिया चुनौतीपूर्ण है ... हम एक एक कर अपने आस पड़ोस में कमजोर पडोसी की भूमिका निभा रहे है.. .. हमें भी अपनी कूटनीतिक प्रयासों पर नए सिरे से परिभाषित करने होंगे.. क्योकि पकिस्तान और चीन कभी भारत के हित के लिए नहीं सोचेंगे.. तो प्रयास ये होना चाहिए.. की हमारा अहित तो न कर सके.

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

आशुतोष जी, आपकी बात बिलकुल सही है और चिंता भी जायज़ है लेकिन मुकदमा चल रहा है तो फैसला आना भी जरूरी है भले ही बाद में ये ही कहना पड़े की फैसला न आता तो अच्छा होता| फैसले के बाद के परिणाम कुछ भी हों लेकिन अभी उस असमंजस कि स्थिति से अच्छे होंगे जिसमे दो कौमें जी रही हैं| इतिहास गवाह है कि गृहयुद्ध भी अंतहीन नहीं होते विनाश के बाद विकास और विकास के बाद विनाश सृष्टि का नियम है निर्विकार भाव से फैसले का इन्तजार करिए और गीता के उपदेशों का स्मरण कीजिये- 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युथानमधरमस्य तदात्मानं सृजाम्यहम |' भय और चिंता की कोई बात नहीं डरने दो इन नेताओं और भ्रष्टाचारियों को, मन में विश्वास रखो न स्वयं विचलित हों न औरों को होने दें - होइहैं वही जो राम रची राखा, को करी तरक बढावहिं साखा |

के द्वारा: chaatak chaatak

शुक्ल जी, कश्मीर में अलगाववादियों का खुला खेल फरुखाबादी कई साल से चल रहा है।  इतिहास गवाह है कि जब भी केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई,देशविरोधी ताकतों ने उसका फायदा उठाया।  कश्मीर में सुरक्षा बल के जवान मारे जा रहे हैं,जगह जगह सुरक्षा कर्मियों की पिटाई की जा रही है।  वहां के मूल निवासी कश्मीरी पंडितों को पहले ही खदेड़ा जा चुका है। तकरीबन साठ हजार सिख  कश्मीर में डटे हुए हैं,यह बात  आतंकियों को हजम नहीं हो रही है,इसलिए उन्हें इस्लाम कबूल  करने के नाम पर धमकाया जा रहा है। याद करिए कि जब कश्मीरी पंडितों को वहां से खदेड़ा जा रहा था  तब भी उस समय कि केंद्र सरकार यही भरोसा दे रही थी,एक बार फिर प्रधानमंत्री व चिदंबरम साहब  भरोसा दे रहे हैं,देखिए इस भरोसे का क्या हश्र होता है।

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