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जंगलराज और हल्लाबोल

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देश के विभिन्न राज्यों में अपराधियों और समाज विरोधी तत्वों के साथ ही राजनैतिक और सामाजिक विद्वेष के कारण होने वाली हत्याओं पर लगातार ही राजनीति की जाती रहती है क्योंकि अधिकांश मामलों में सत्ता पक्ष को घेरने का इससे अच्छा मौका और कहीं नहीं मिलता है तथा सरकार पर अपराधियों को बढ़ावा दिए जाने के आरोप लगाना भी बहुत आसान हुआ करता है. यह भी स्थापित सत्य है कि लोकतंत्र की कानून के अनुसार चलने की अपनी ही मजबूरी होती है और किसी भी परिस्थिति में कोई भी दल डंके की चोट पर यह नहीं कह सकता है कि उसके शासित राज्य में पूरी तरह से शांति बनी रहती है. बिहार में नेता पुत्र की दबंगई के बाद जिस तरह से झारखण्ड और बिहार में पत्रकारों की हत्या हुई है उसके बाद बिहार ही जंगल राज के नाम पर बदनाम किया जा रहा है जबकि दिल्ली में एक डॉ० को उसकी क्लिनिक से निकाल कर मार दिया गया और विहिप के नेता प्रवीण तोगड़िया के चचेरे भाई की गुजरात में दो अन्य लोगों के साथ चाकू मारकर हत्या कर दी गयी उस बात पर इन राज्यों पर कोई उतना मुखर नहीं होता है ?
यह अपने आप में स्थापित तथ्य है कि बिहार लम्बे समय से हर तरह की अराजकता के लिए बदनाम रहा है पर उसका यह मतलब भी नहीं है कि वहां हर तरफ केवल अराजकता ही है क्योंकि जब से नितीश सरकार ने वहां सत्ता संभाली है उनकी तरफ से अपराधियों पर लगातार शिकंजा कसा ही जा रहा है. उनके इस प्रयास में पहले भाजपा उनकी साझेदार थी और अब कांग्रेस उनके साथ सत्ता संभाल रही है फिर भी जिस स्तर पर वहां कानून का राज स्थापित हुआ है वह अपने आप में महत्वपूर्ण भी है परन्तु बिहार पूरी तरह से अराजकता से मुक्त हो गया हो ऐसा भी नहीं है. इसलिए नितीश सरकार की मंशा पर केवल राजनैतिक कारणों से ही दबाव बनाने की अनावश्यक कोशिशों से हर दल को पूरी तरह से बचना भी चाहिए क्योंकि इतने लम्बे समय से अराजकता झेल रहे प्रदेश में इतनी जल्दी पूरी तरह से सब कुछ सामान्य भी नहीं किया जा सकता है. अपराधियों का पूरी दुनिया में एक जैसा ही चरित्र हुआ करता है और उन पर सख्ती के साथ दबाव बनकर उन्हें कानून के द्वारा सजा दिलवाने की हर संभव कोशिश भी की जानी चाहिए क्योंकि उनके कारनामों का ज़िक्र करके सरकारों को कटघरे में खड़ा करना बहुत आसान है पर धरातल पर उन्हें सजा दिलवाना बहुत कठिन भी होता है.
देश में लम्बे समय से प्रतीक्षारत रहने वाले पुलिस सुधारों पर अब पूरे देश को मिलकर काम करने की आवश्यकता है क्योंकि आज बढ़ती हुई तकनीक के चलते अपराधी भी पूरे देश में अपराध करने लगे हैं और उनके बारे में एक राज्य में तो मुक़दमे पंजीकृत होते हैं पर दूसरे राज्यों में जन सामान्य और पुलिस भी इस बात से अनभिज्ञ रहा करते हैं और उनकी तरफ से किसी बडी घटना को अंजाम देने के बाद ही उनके बारे में पूरी जानकारी मिल पाती है. अच्छा हो कि हमारे नेता इस मसले पर घटिया राजनीति करने के स्थान पर पूरे देश में कानून का ढांचा खड़ा करने और पुलिस को मजबूत करने की दिशा में ठोस काम करने के बारे में सोचें क्योंकि केवल हत्या और अपराधों के दम पर ही किसी राज्य को हर तरह से सही और गलत नहीं ठहराया जा सकता है. नितीश कुमार पर अपने को साबित करने का बहुत बड़ा दबाव भी है और कोई भी उनकी मंशा पर संदेह भी नहीं कर सकता है फिर भी अभी उन्हें और तेजस्वी यादव को मिलकर ही यह तय करना है कि आने वाले बिहार की मजबूत नींव कैसे रखनी है क्योंकि नितीश ने लम्बे समय तक बिहार पर राज किया है परन्तु तेजस्वी की पारी अब शुरू ही हुई है. कानून की स्थापना करने के लिए बयानों में सभी पक्षों को शालीनता बनाए रखते हुए अपने दलों में आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों से बचने और उनकी छंटनी करने की बहुत आवश्यकता है.

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajeev Varshney के द्वारा
May 16, 2016

अगर तेजस्वी को राजनीती में लम्बी पारी खेलनी है तो उन्हें सुशासन के मसले पर अपनी सक्रियता दिखानी होगी. तभी वे बिहार को जंगल राज रिटर्न के धब्बे से छुटकारा दिला पाएंगे.

jlsingh के द्वारा
May 16, 2016

आप सही कह रहे हैं डॉ. आशुतोष शुक्ल जी ! बिहार और नीतीश को बदनाम करने के की पूरी शाजिश चल रही है, मीडिया भी इसे भुना रहा है.


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