***.......सीधी खरी बात.......***

!!!!!!!!!!!! मेरी हर धड़कन भारत के लिए है !!!!!!!!!!

2,131 Posts

515 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 488 postid : 1122658

रेलवे अतिक्रमण और राजनीति

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पश्चिमी दिल्ली के शकूर बस्ती स्टेशन के पास रेलवे और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्यवाही में हटाये गए अतिक्रमण को लेकर जिस तरह से राजनीति शुरू हो चुकी है उसका कोई मतलब नहीं बनता है क्योंकि ये सभी लोग यहाँ पर अनाधिकृत रूप से रह रहे थे और कई बार रेलवे की तरफ से नोटिस जारी किये जाने के बाद भी यहाँ से हटने के लिए तैयार नहीं थे तो उस स्थिति में यदि रेलवे के द्वारा पुलिस की सहायता से अतिक्रमण को हटाने की कोशिश की जाती है तो नियमानुसार उसमें राजनीति की कोई गुंजाईश नहीं होनी चाहिए पर इस तरह के आवश्यक कार्यों में भी अनाधिकृत लोगों के पक्ष में खड़े होकर लगभग सभी राजनैतिक दल अपनी रोटियां सेंकते रहते हैं. इसी क्रम में इस बार दिल्ली के सीएम खुद चुनावी राजनीति के लाभ में अवैध तरीके से बसे हुए लोगों के पक्ष में खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं. इस मामले में किसी एक पक्ष को किसी भी स्तर ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि ये सारा अतिक्रमण कोई एक दिन में नहीं हो जाता है और इसमें सरकार, राजनैतिक दल और कई बार रेलवे के कुछ लोग भी शामिल हुआ करते हैं जिससे आम लोगों की इस तरह से सरकारी और आवश्यक भूमि पर कब्ज़ा करने और रहने की हिम्मत हो जाती है.
पूरे देश में रेलवे की भूमि पर अवैध कब्ज़े किये गए हैं और खुद रेलवे की लापरवाही से भी निरंतर उसकी सीमा के अंदर तक इस तरह के निर्माण आज उसके मुँह चिढा रहे हैं. आज भी यदि एक स्पष्ट नीति के तहत रेलवे अपनी इस भूमि को पूरे देश में छुड़ाने की कोशिशें शुरू करे तो आने वाले समय में उसके पास शहरों में प्राइम जगहों पर लाखों हेक्टेयर भूमि उपलब्ध हो जाएगी जिससे वह अपनी नियमित आय को भी बढ़ाने का काम कर सकती है पर उसकी तरफ से केवल उन स्थानों पर ही ऐसे प्रयास किये जाते हैं जिनमें उसके नेटवर्क के विकास और परिचालन से जुडी हुई समस्याएं सामने आती हैं. आज जो भूमि लापरवाही में लोगों के हाथों में जा रही है कल उसकी आवश्यकता पड़ने पर रेलवे को दुनिया भर की कोशशें करनी होंगीं फिर भी शकूर बस्ती जैसी राजनीति नहीं की जाएगी इसका कोई जवाब नहीं दे सकता है. इस कार्यवाही को सामान्य रूप से देखा जाना चाहिए और जहाँ तक एक बच्चे के इस अभियान में मरने की बात भी कही जा रही है उससे भी सही तरह से निपटा जाना आवश्यक है क्योंकि एक बार मौत पर राजनीति शुरू हो गयी तो अभियान किनारे रखा रह जायेगा और केवल राजनीति ही हावी हो जाएगी.
सैकड़ों की संख्या में लोगों को इस तरह से हटाये जाने से कई तरह की समस्याएं भी सामने आती है पर क्या इस तरह से किसी को भी रेलवे की भूमि और सीमा के अंदर बसने की अनुमति दी जा सकती है ? केवल अतिक्रमण को यदि छोड़ भी दिया जाये तो आने वाले समय में क्या रेलवे लाइन्स के इतने नज़दीक रहने वाली बस्तियों में घुसकर आतंकियों के लिए रेलवे नेटवर्क को शहरों के अंदर तबाह करने की खुली छूट नहीं मिल सकती है क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था केवल रेलवे स्टेशनों तक ही सीमित रहा करती है और बस्तियों के आस पास लोगों की अत्यधिक गतिविधि के चलते किसी का भी ध्यान इस तरफ नहीं जाता है. रेलवे लाइन के इतने नज़दीक होने वाली आबादी से वहां रहने वाले लोगों की जान पर भी सदैव खतरा मंडराता रहता है जिससे भी बचने की आवश्यकता है. देश में राजनीति करने के लिए बहुत सारे अन्य क्षेत्र खुले पड़े हैं पर इस तरह से सरकारी ज़मीनों पर कब्ज़े की कोशिशों का किसी भी स्तर पर समर्थन नहीं किया जाना चाहिए और शहरों की तरफ पलायन करने वाले लोगों पर भी विशेष नज़र राखी जानी चाहिए जिससे वे इस तरह की ज़मीनों पर अपने अवैध घर न बना सकें.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran