***.......सीधी खरी बात.......***

!!!!!!!!!!!! मेरी हर धड़कन भारत के लिए है !!!!!!!!!!

2,145 Posts

868 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 488 postid : 1116481

जन-धन योजना के लाभ

  • SocialTwist Tell-a-Friend

देश के दूर दराज़ के गांवों में रहने वाली जनता के पास बैंकिंग सेवाओं की पहुँच बनाये रखने के लिए २०१२ में लालकिले से अपने सम्बोधन में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने यह घोषणा की थी की २०१४ तक देश में बैंकिंग ढांचे को इतना मज़बूत कर लिया जायेगा कि उन सभी लोगों के पास एक बैंक खाता आवश्य होगा जो अभी इस सुविधा से वंचित हैं. इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए जिस तरह से २०१२ से ही बैंकों को सीधे निर्देश दिए गए और उसी क्रम में पिछले वर्ष पीएम मोदी द्वारा इस योजना को सितम्बर माह से लागू कर दिया गया था. एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी लोगों को इस योजना के बारे में सही तरह से न बताये जाने के कारण ही अभी भी बैंकों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है क्योंकि इन खातों के साथ न्यूनतम संचालन की जो अवधि निर्धारित की गयी है आम लोगों को उसके बारे में जागरूक ही नहीं किया गया है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि नियमित सञ्चालन होने वाले खातों को ही ही इससे मिलने वाले सभी लाभ मिल सकते हैं और जिनके द्वारा यह शर्त पूरी नहीं की जाएगी वे हर तरह के लाभ से वंचित हो जायेंगें.
इस योजना से आम जनता को तो अभी उतना लाभ नहीं मिल सका है जितना मिलने की संभावनाएं हैं पर यह योजना एक सफल अर्थशास्त्री पीएम मनमोहन सिंह का सपना होने के चलते आज बैंकों के लिए वरदान बन चुकी है जिससे देश के सभी बैंकों के जीरो बैलेंस खातों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली है. इस योजना से पहले बैंकों के जीरो बैलेंस वाले खाते लगभग ७७% थे जो अब घटकर ३६% पर आ चुके हैं और आने वाले समय में यदि इस योजना के बारे में ग्राम स्तर पर चौपालों में विस्तार से बताय जाये तो जिन लोगों ने अभी तक इस योजना की शर्तों एक अनुरूप खातों के सञ्चालन पर ध्यान नहीं दिया है वे भी आसानी से इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं. इतना ही नहीं इतने छोटे प्रयास से आज इस योजना के तहत बैंको के पास लगभग २७००० करोड़ रूपये जमा हो चुके हैं जिनके माध्यम से बैंकों की स्थिति भी अच्छी हुई है और सरकार के पास इतनी बड़ी धनराशि भी आसानी से आ गयी है. योजना के स्वरुप को अभी और भी व्यापक करने की आवश्यकता है और जिन लोगों की इसकी सुविधाओं के बारे में पूरी जाकारी नहीं है उन तक पहुंचना भी एक चुनौती भरा कदम साबित हो सकता है.
सरकार ने इस योजना से बैंको के माध्यम से जो लाभ पाया है वह अपनी जगह पर है पर अब बैंकों को एक बार पूरे देश में अभियान चलाकर उन खातों को बंद करने के बारे में सोचना चाहिए जो केवल बिना सोचे समझे ही खोल दिए गए थे. इसके तहत लोगों को अपने मूल खाते को जनधन योजना में बदलने के विकल्प के बारे में बताया जाना चाहिए जिससे वे अनावश्यक रूप से कई खाते खोलकर न बैठ जाएँ और इन दोहरे पर बेकार पड़े खातों को सँभालने के लिए बैंकों को अपने संसाधन भी जुटाने पड़ें. बैंकिंग सेक्टर को जितना वर्तमान व्यवस्था में सुधारा जा सकता है उसके लिए गंभीर प्रयास करने होंगें और यह केवल वित्त मंत्रालय के आदेशों से ही संभव है क्योंकि जब तक बैंकों की परिचालन लागत को सही करने में सफलता नहीं मिलेगी तब तक इस तरह कि योजनाएं भी उनके लिए बड़ा सरदर्द साबित हो सकती हैं. जन-धन योजना की वर्तमान सफलता के साथ ही जीरो बैलेंस वाले खातों के प्रतिशत को और भी निचले स्तर पर लाने के लिए वित्त मंत्री जेटली को भी नए सिरे से सोचना होगा. पीएम बनने के बाद मोदी ने भी जिस तरह से मनमोहन सिंह की नीतियों की तारीफ की थी तो देशहित में यदि सरकार उनसे कोई सलाह लेना चाहेगी तो वह भी उसे आसानी से मिल सकेगी.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

atul61 के द्वारा
November 23, 2015

यह दुर्भाग्य है देश का कि कोई भी अच्छी योजना लागू की जाती है उससे पूरी तरह लाभार्थी को समझया नहीं जाता I जानकारी के अभाव में खाते तो खुल गए पर उनमें रुपे कार्ड के उपयोग द्वारा लेन देन नहीं  के बराबर हैं अतः 5000 तक के ओडी और बीमा के लाभ से लोग वंचित हैं I बहुत सारे खाते अंगूठा लगाने वालों के हैं वो रुपे कार्ड का प्रयोग नहीं कर सकते Iजीरो बैलेंस खातों के जरिए विभिन्न प्रकार की सामाजिक पेंशन लाभार्थी पा रहे हैं और वर्तमान में जिन के पास एलपीजी गैस है उसकी सब्सिडी ले रहे हैं Iवर्तमान में  बैंक कर्मचारियों पर कार्य का दवाब बहुत है यदि उन पर बिना किसी ठोस योजना के कोई भी स्कीम लादी जायेगी तो उसका हश्र गोल्ड स्कीम जैसा ही होगा I जीरो बैलेंस में धन दिखाई देने के पीछे बैंक के द्वारा अपनी जीसीसी स्कीम के अंतर्गत लोन देना भी है Iबैंक 2012 से फाइनेंसियल इन्क्लुस्न का कार्य कर रहे हैं जिसमें पात्र लोगों को छोटे कर्ज उपलब्ध कराना भी है


topic of the week



latest from jagran