***.......सीधी खरी बात.......***

!!!!!!!!!!!! मेरी हर धड़कन भारत के लिए है !!!!!!!!!!

2,131 Posts

515 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 488 postid : 953076

राष्ट्रवादी हुए साबिर अली भी

  • SocialTwist Tell-a-Friend

देश के राजनैतिक परिदृश्य पर लम्बे समय से इस बात को लेकर ही बहस चल रही है कि राजनीति को अपराधिक और असामाजिक प्रवृत्ति के लोगों से कैसे बचाया जाये पर देश में सक्रिय लगभग हर दल इस तरह की कोरी बातें करने के अलावा कुछ भी करता हुआ नहीं दिखाई देता है क्योंकि आज के समय की चुनावी राजनीति में विचारधारा के स्तर पर कोई कुछ भी सोचना और करना नहीं चाहता है केवल चुनाव जीतने लायक चेहरों और जातीय गोटियों में किसी भी तरह फिट होकर कुछ राजनैतिक लाभ दिलवाने वाले तत्वों से हाथ मिलाने में किसी भी दल को कोई दिक्कत नहीं होती है. पिछले वर्ष आम चुनावों में जिस तरह से बिहार के जेडीयू नेता साबिर अली के मोदी की तारीफ करने और पार्टी से निकाले जाने के बाद भाजपा के निकट आने पर मुख़्तार अब्बास नक़वी ने आतंकी बताकर खुला विरोध जताया था अब उसका भी कोई मतलब नहीं रह गया है क्योंकि आज भाजपा को बिहार में एक नया मुस्लिम नेता ही चाहिए है जो बिहार की छवि के अनुरूप कुछ करने का दम रखता हो और समभवतः अपने आप भाजपा के नज़दीक आने वाले साबिर अली इससे अच्छे विकल्प के रूप में सामने नहीं लाए जा सकते थे.
देश की राजनीति में अपराधियों और अराजक तत्वों के साथ पर लगभग सभी दल एक जैसा ही सोचते हैं जब तक इस तरह का कोई भी विवादित व्यक्ति दूसरे दल में होता है तब तक उससे बड़ा सामाजिक अपराधी कोई नहीं होता है पर पार्टी विशेष में आस्था दिखाने के बाद अचानक से ही वह इतना पवित्र हो जाता है कि उसकी तारीफें भी शुरू कर दी जाती हैं तो यह भारतीय राजनीति के उस घटियापन के नमूने को ही दर्शाता है जिसमें सदन के अंदर बैठे हुए यही नेता संविधान, कानून, देश प्रेम और भी न जाने किन किन बातों की कसमें खाया करते हैं पर बाहर निकलते ही उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता और वे स्पष्ट रूप से मतिभ्रम का शिकार ही लगते हैं. यह कहा जा सकता है कि सत्ता ऐसी होती है कि वह बड़े बड़ों को आदर्शों के पथ से बहुत जल्दी ही पद्दलित कर देती है अस्थायी सफलता किस तरह से किसी दल के नैतिक मानदंडों पर अचानक से बाज़ारू नर्तकी बन जाती है और पार्टियों के नेता उसकी ताल पर मंत्रमुग्ध होकर नाचने लगते हैं और साथ ही लोकतंत्र को अपराधियों से मुक्त करने की लम्बी चौड़ी बातें भी किया करते हैं.
साबिर अली से नक़वी का टकराना उनके हितों पर चोट के कारण भी हो सकता है पर राजनीति में सुधार करने की कसमों के साथ संघ के ध्वज के नीचे खड़े होकर “तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें” का गान करने वाली भाजपा के सामने ऐसी क्या मजबूरी है कि वह साबिर अली का इस्तेमाल करने का प्रयास कर रही है ? साबिर अली और नक़वी के अपने हित हो सकते हैं और आने वाले समय में बिहार से देश की राजनीति की नयी राह फिर से निकलने की सम्भावनाएँ दिखायी दे रही हैं इन चुनावों के परिणाम एक बार फिर से यही दिखाने वाले हैं कि क्या बिहार जिसने एक दशक में प्रगति करने का स्वाद चखा है वह अपने जातीय पूर्वाग्रह से बाहर निकल पाया है या फिर मोदी पिछड़े हैं और मांझी अति पिछड़े वह आज भी फिर से उसी सोच की तरफ बढ़ने जा रहा है ? पिछले वर्ष जिस तरह आम चुनावों में पूरे उत्तर भारत में जिस तरह से मोदी के नाम पर भाजपा ने जातीय दुष्चक्र को पूरी तरह से तोड़ने में सफलता पायी थी संभवतः आज भाजपा को ही उन मोदी और उनके विकास के दावों पर भरोसा नहीं रह गया है तभी वह इस बार बिहार को एक बार फिर से उसी जातीय दलदल में उलझाने की तैयारी में लगी हुई दिखाई दे रही है.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

3 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajuahuja के द्वारा
July 24, 2015

इस देश का राजनैतिक परिवेश निम्नतम स्तर तक आ पंहुचा है ! पार्टी हितों के आगे राष्ट्र हित गौण हो चुका है ! सभी राजनैतिक दल सत्ता के सुख की खातिर सारे समीकरण हल करने के हर संभव प्रयास करते नजर आते हैं ! चाहे जो भी करना पड़े , सत्ता पर काबिज होना ही एक मात्र लक्ष रह गया है !…

rajuahuja के द्वारा
July 24, 2015

इस देश का राजनैतिक परिवेश निम्नतम स्तर तक आ पंहुचा है ! पार्टी हितों के आगे राष्ट्र हित गौण हो चुका है ! सभी राजनैतिक दल सत्ता के सुख की खातिर सारे समीकरण हल करने के हर संभव प्रयास करते नजर आते हैं ! चाहे जो भी करना पड़े , सत्ता पर काबिज होना ही एक मात्र लक्ष रह गया है !

rajuahuja के द्वारा
July 24, 2015

इसे विडम्बना ही कहा जाएगा कि, इस देश में राजनैतिक पार्टियाँ अपने हित के समक्ष राष्ट्रिय हित को सदैव ही गौण समझती आई है ! सत्ता प्राप्ति ही इनका लक्ष रह गया है ! ऐसे में इन्हें किसी भी स्तर पर जाने में कोई परहेज नहीं ! एक अच्छे लेख के लिए साधुवाद आशुतोष जी !  


topic of the week



latest from jagran