***.......सीधी खरी बात.......***

!!!!!!!!!!!! मेरी हर धड़कन भारत के लिए है !!!!!!!!!!

2,150 Posts

868 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 488 postid : 951271

लेह (लद्दाख)- अराजक टैक्सी यूनियन

Posted On: 22 Jul, 2015 बिज़नेस कोच,social issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पिछले कुछ वर्षों में लेह की टैक्सी यूनियन की तरफ से राज्य के बाहर से आने वाली टैक्सियों को रोके जाने और उनके साथ अभद्रता करने के कई मामले सामने आया करते थे पर उन मामलों पर कभी भी देश में गंभीर चिंता नहीं व्यक्त की गयी क्योंकि संभवतः आम पर्यटकों को इस तरह की छुटपुट घटनाओं का कभी भी सामना नहीं करना पड़ता है. अपने आप में प्राकृतिक सुंदरता को समेटे हुए लेह और उसके आस पास लद्दाख के अन्य पर्यटन स्थल कुछ वर्षों में तेज़ी से घरेलू पर्यटकों में लोकप्रिय होते जा रहे हैं जिसका लाभ वहां के स्थानीय निवासियों को भी भरपूर रूप से मिल रहा है पर्यटकों की इस तरह से कम समय में बढ़ती हुई संख्या ने ही अपने वाहनों से लेह की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए समस्याएं बढ़ानी शुरू कर दी हैं जिनका आने वाले समय में सीधे इस क्षेत्र के पर्यटन पर ही पड़ने वाला है. आज जिस तरह से श्रीनगर में अलगाववादियों की उपस्थिति घरेलू और विदेशी पर्यटकों को वहां उस तरह से जाने से रोकती है जितना वहां जाया जा सकता है उसी अराजकता की राह पर आगे बढ़ने के कारण आने वाले समय में लेह भी इसी तरह के खतरनाक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है.
असल में समस्या की जड़ सारा लाभ खुद ही कमाने में छिपी हुई है जिसमें लेह के स्थानीय टैक्सी मालिकों की खुली और पूरी भागीदारी भी रहा करती है जिसके अंतर्गत वे बाहर से अाने वाले किसी भी टैक्सी को लेह में चलने नहीं देते हैं और पर्यटकों पर यह दबाव बनाने की कोशिशें करते हैं कि यदि वे अपनी टैक्सी से भी आये हैं तो भी उनको उसे वहां पर खड़ा कर स्थानीय टैक्सी का ही उपयोग करें वर्ना उनके साथ मारपीट भी की जाती है. इस पूरे मामले पर नज़र रखने के लिए स्थानीय युवा चालकों को यह ज़िम्मेदारी भी दी गयी है कि वे इस तरह से लेह में आने वाली टैक्सियों पर नज़र भी रखें. चूंकि लेह आने जाने के मनाली और श्रीनगर होकर दो ही रास्ते हैं इसलिए आने वाले लोगों पर इन स्थानों से ही नज़र रखने का काम शुरु कर दिया जाता है और लेह पहुँचने पर या रास्ते में ही उनसे अभद्रता भी की जाती है. इस तरह के माहौल के और भी अधिक प्रचारित होने से क्या आने वाले समय में लेह के पर्यटन उद्योग पर बुरा असर नहीं पड़ेगा और क्या जम्मू कश्मीर सरकार के साथ ही स्थानीय पुलिस प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठा सकता है ?
इस अराजकता पर देश में पर्यटन को बढ़ावा देने में लगी हुई केंद्र सरकार को कुछ ठोस कदम भी उठाना चाहिए क्योंकि जब तक यहाँ आने वाले रोमांचक पर्यटन में शामिल लोगों की सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं होगी तो क्या पर्यटकों का प्रवाह इसी तरह से बना रह सकेगा यह सोचने का विषय है. अच्छा होता कि ये टैक्सी मालिक लेह की उस परंपरा को जीवंत रखने का काम ही किया करते जिसमें वहां के होटल वाले जिया करते हैं और लेह से लौटने वाले अधिकांश लोग अच्छी यादें ही लेकर आते हैं. रोमांचक पर्यटन के लिए निकलने वाले लोगों की सुरक्षा के बारे में अब केंद्र, राज्य सरकार के साथ ही स्थानीय लोगों को भी सोचना ही होगा क्योंकि यह भी पर्यटन का एक हिस्सा है और पूरे पर्यटकों की संख्या का बहुत कम हिस्सा ही इस सीमा में आता है. जो लोग अन्य साधनों से लेह आ जा रहे हैं उन्हें या टैक्सी यूनियनों को उनसे कोई दिक्कत नहीं है और उनका व्यवहार भी बहुत अच्छा रहा करता है पर टैक्सी के मामले में जिस तरह से अराजकता का माहौल बनाया जाता है आज उस पर कड़े नियंत्रण की आवश्यकता भी है क्योंकि आने वाले समय में इस छोटी सी अराजक शुरुवात की अनदेखी करने से इसका बुरा असर लेह के पूरे पर्यटन उद्योग पर पड़ने की पूरी सम्भावना है.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran