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माया की माया ?

Posted On: 20 Feb, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में जिस तरह से आंबेडकर ग्राम की सड़कों के निर्माण में धांधली खुलकर सामने आई है उसके बाद यह तो तय हो ही गया है की अब भ्रष्टाचारियों में माया सरकार का कोई डर नहीं रह गया है. सभी को याद होगा कि अपने पिछले अल्पमत के कार्यकालों में माया ने जिस तरह से सरकारी तंत्र की तंत्रिकाओं को झकझोर दिया था उससे जनता को लगा था कि शायद पूर्ण बहुमत में आने पर प्रदेश में नौकर शाही पर कुछ लगाम तो लग ही जाएगी पर आज जो हालात दिखाई दे रहे हैं वे पिछली सरकारों से भी बुरी स्थिति को दिखाते हैं. जब सरकार की उच्च प्राथमिकता में शामिल आंबेडकर ग्राम ही भ्रष्टाचार से नहीं बच पा रहे हैं तो पूरे प्रदेश में और क्या हाल होगा किसी से छिपा नहीं है ? अब कुछ सतर्क ग्रामीणों की शिकायत पर जब मामला सामने आ ही गया है तो कुछ लोगों को निलंबित कर उनकी ज़िम्मेदारी समझाई जा रही है.
प्रदेश में विकास की सोच कहाँ तक है इस बात का अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि सरकार केवल लखनऊ में ही विकास की बातें कर रही है जबकि पूरे प्रदेश को विकास की आवश्यकता है. अभी वर्तमान में कुम्भ मेला चल रहा है पर सरकार ने उत्तरांचल जाने वाली सड़कों की जो हालत बना रखी है वह पूरे देश के माथे पर कलंक से कम नहीं है. इस अवसर पर पूरे प्रदेश से श्रद्धालु हरिद्वार जाते हैं पर मुरादाबाद से हरिद्वार जाने का प्रयास करके तो देखिये ? विकास की झूठी कहानी और मक्कारी की एक और कहानी सामने आ जाएगी. उत्तरांचल में आने वाली सड़कें तो बहुत अच्छी हैं और वे विकास करते उत्तर प्रदेश के खोखले दावे की पोल खोलते रहते हैं ? क्योंकि जब हम उत्तर प्रदेश से उत्तरांचल में प्रवेश करते हैं चौड़ी और साफ सुथरी सड़कें हमारा स्वागत करती हैं. आखिर वहां पर यह सब कैसे हो रहा है जो हमारे यहाँ नहीं हो पा रहा है ? प्रदेश में वसूली का जो आलम है उसने तो विकास के मायने ही बदल दिए हैं ?
कोई भी नहीं पूछ रहा कि जो माननीय अभी तक केवल आम आदमी थे मात्र ३०००० के वेतन से एकदम से कैसे बड़ी बड़ी गाड़ियों में घूमने लगते हैं ? एक अदने से बाबू के पास भी आलीशान बंगला कहाँ से आता है ? सरकारी अधिकारियों के पास इतनी संपत्ति कहाँ से आ रही है ? सब खा और खिला रहे हैं सबका पेट भर रहा है पर वोट देकर सर्व समाज का सपना देखने वाला वोटर एक बार फिर से ठगा सा महसूस कर रहा है क्योंकि उसकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता है केवल चंद लोग ही उसके हिस्से की रोटी लूट कर मलाई मारने में एक बार फिर से लग गए हैं. …….

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

मनोज के द्वारा
February 22, 2010

उत्तर प्रदेश में “माया ” की माया का ऐसा जादू है जो गरीब को अमीर और अमीर को रंक बना देता है. माया जी के पुतलों का तो कुछ कहना ही नही मंत्रियों की हिम्मत देख तो सैनिक भी घबरा जाएं. और जिस नेता के मंत्रियों का यह हाल हो उस नेता के ज्या कहनें !

Sharad के द्वारा
February 20, 2010

सत्य वचन आशुतोष जी, मगर अब प्रशं ये है की माया के माया जाल की अंत कैसे हो. कैसी मिलेगी निजात सत्ता के लुटेरो से. कौन दिलाएगा मुक्ति…आखिरकार ये सभी जनता के चुनाव का हिस्सा है. जनता के ही आँखों पैर माया की पट्टी बंधी है. ऐसे ना जाने कितने ही प्रशं हमारे मन में आते है परन्तु समाधान नहीं समझ में आता. हम आप मिलकर व्यक्तिगत उपायों से कुछ भी नहीं बदल सकते. आपके पास कुछ सुझाव हो तो जरुर व्यक्त करियेगा. शरद पाण्डेय


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